नर्मदा संरक्षण के लिए आईजीएनटीयू के समाज कार्य विभाग की जन-जागरूकता पहल

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नर्मदा संरक्षण के लिए आईजीएनटीयू के समाज कार्य विभाग की जन-जागरूकता पहल

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के समाज कार्य विभाग द्वारा पवित्र नर्मदा नदी की स्वच्छता, संरक्षण एवं पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रामघाट, नर्मदा मंदिर परिसर, अमरकंटक में जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को नर्मदा नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण के साथ-साथ इसके आसपास के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाना था।

पवित्र श्रावण मास के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नर्मदा मंदिर में दर्शन एवं पूजन के लिए आए श्रद्धालुओं तथा स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने नर्मदा नदी की स्वच्छता, संरक्षण एवं पर्यावरण रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत जीवनशैली अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

जन-जागरूकता अभियान के दौरान शोधार्थियों ने श्रद्धालुओं एवं नागरिकों से संवाद कर नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने, प्लास्टिक एवं अन्य प्रदूषणकारी वस्तुओं का उपयोग कम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया। “नर्मदा बचाओ, प्रकृति बचाओ, भविष्य बचाओ” तथा “एक कदम स्वच्छ नर्मदा के नाम” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को नर्मदा संरक्षण में व्यक्तिगत एवं सामूहिक सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।
इस अभियान का संचालन समाज कार्य विभाग के पीएचडी शोधार्थियों जिनिमोल जे, आरती कैवर्त, इमल नारायण चौधरी, श्रवण कुमार पटेल एवं सारण्या एम. द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विभाग के संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन एवं सहयोग में किया गया।

इस पहल के माध्यम से समाज कार्य विभाग के शोधार्थियों ने यह संदेश दिया कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि अमरकंटक की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न अंग है। इसकी पवित्रता और निर्मलता बनाए रखना केवल संस्थाओं अथवा प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और श्रद्धालु की साझा जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी पर्यावरण-अनुकूल आदतों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से नर्मदा एवं उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

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