सीएमपीडीआई–सिपेट की नई पहल से 80 युवाओं को मिलेगा रोजगार का हुनर

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सीएमपीडीआई–सिपेट की नई पहल से 80 युवाओं को मिलेगा रोजगार का हुनर

सीएसआर के तहत 47.52 लाख रुपये की परियोजना, चार माह के आवासीय प्रशिक्षण से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

रांची। युवाओं को तकनीकी कौशल से सशक्त बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की दिशा में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सीएमपीडीआई ने बुधवार को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट), रांची के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) योजना के अंतर्गत वंचित, बेरोजगार एवं अर्द्धरोजगार युवाओं को उद्योग आधारित आवासीय कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।

एमओए पर सीएमपीडीआई की ओर से महाप्रबंधक (मानव संसाधन/सीएसआर) संजय कडम्बार तथा सिपेट, रांची की ओर से निदेशक एवं प्रमुख अवनीत कुमार जोशी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीएमपीडीआई मुख्यालय की सीएसआर टीम और सिपेट के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

समझौते के तहत झारखंड के रांची, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद और लातेहार जिलों के 80 वंचित, बेरोजगार एवं अर्द्धरोजगार युवाओं का चयन कर उन्हें सिपेट, रांची में चार माह का पूर्णतः आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण मशीन ऑपरेटर–प्लास्टिक प्रोसेसिंग (एमओ-पीपी) तथा मशीन ऑपरेटर–टूल रूम (एमओ-टीआर) जैसे उद्योगोन्मुखी ट्रेडों में होगा। प्रत्येक ट्रेड में 40-40 अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा।

प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 600 घंटे का सघन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें सैद्धांतिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक तकनीकों, मशीन संचालन और विनिर्माण प्रक्रियाओं की जानकारी देकर उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संचालन के लिए सीएमपीडीआई ने 47.52 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले युवाओं को प्लास्टिक प्रोसेसिंग, टूल रूम संचालन तथा अन्य विनिर्माण इकाइयों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

सीएमपीडीआई का मानना है कि कौशल विकास आधारित यह पहल न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उन्हें सम्मानजनक रोजगार दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगी। विशेषज्ञों के अनुसार उद्योग की मांग के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण से प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और राज्य में कौशल आधारित मानव संसाधन तैयार करने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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