गुरु पूर्णिमा पर गुरुजनों का सम्मान, मेधावी शिक्षकों और विद्यार्थियों को किया गया पुरस्कृत

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गुरु पूर्णिमा पर गुरुजनों का सम्मान, मेधावी शिक्षकों और विद्यार्थियों को किया गया पुरस्कृत

शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जमुना कॉलरी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

जमुना कॉलरी। शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जमुना कॉलरी में गुरु पूर्णिमा पर्व श्रद्धा, सम्मान और भारतीय संस्कृति की गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य अवधराज सिंह सोलंकी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके बाद छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं गुरु वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अपने गुरुजनों का तिलक लगाकर, पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर प्राचार्य अवधराज सिंह सोलंकी ने कहा कि गुरु जीवन का वह प्रकाश है, जो ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन और समर्पण की भावना बनाए रखने का आह्वान किया

विद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान वर्ष 2026 की वार्षिक परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं का भी विशेष सम्मान किया गया। सम्मानित होने वालों में सुचिता शर्मा, अमित कुमार राहा, रनेश पड़वार, संगीता राव, जमुना प्रसाद सोनी, महेंद्रदास चौधरी, अतिथि शिक्षक राघवेंद्र तिवारी, श्वेता आदित्य, रिंकू पटेल एवं सोम लोधी शामिल रहे। सभी शिक्षकों को श्रीफल, पेन एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।

विद्यालय में 16 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक गुरु पूर्णिमा पर्व के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्राचार्य द्वारा पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसकी सभी ने सराहना की।

कार्यक्रम का सफल संचालन संगीता राव एवं रनेश पड़वार ने किया। समारोह के अंत में विद्यालय परिवार ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से जीवन में गुरु के मार्गदर्शन का सम्मान करने और शिक्षा के साथ संस्कारों को भी अपनाने का संदेश दिया। यह आयोजन विद्यालय में गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास की दिशा में प्रेरणादायक पहल साबित हुआ

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