सरगुजा वन वृत्त के 125 अधिकारियों को सूचना का अधिकार कानून का प्रशिक्षण

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सरगुजा वन वृत्त के 125 अधिकारियों को सूचना का अधिकार कानून का प्रशिक्षण

एक दिवसीय कार्यशाला में डॉ. डी.के. सोनी ने बताए आरटीआई अधिनियम के कानूनी प्रावधान, समयबद्ध एवं पारदर्शी सूचना उपलब्ध कराने पर दिया जोर

अंबिकापुर। सरगुजा वन वृत्त के अंतर्गत सामान्य टेरिटोरियल एवं वन्यजीव प्रभागों के जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए गुरुवार को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम-2005 विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर के निर्देश एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम के नवीनतम प्रावधानों, कानूनी प्रक्रियाओं तथा सूचना आवेदनों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण के संबंध में प्रशिक्षित करना था।

कार्यशाला में सरगुजा संभाग के छह वन मंडलों से जन सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी, वनमंडलाधिकारी, एसडीओ, रेंज अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर तथा शाखा प्रभारी सहित लगभग 120 से 125 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आरटीआई अधिनियम के व्यावहारिक पहलुओं, सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, अपील की व्यवस्था तथा विभागीय जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 से प्रभावी है और समय-समय पर अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से इस विषय पर कोई कार्यशाला आयोजित नहीं हुई थी। इस दौरान आरटीआई कानून से जुड़े कई नए न्यायिक निर्णय, प्रक्रियागत बदलाव और व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई हैं। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरगुजा संभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया, ताकि वे कानून की भावना के अनुरूप बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

कार्यशाला के मुख्य संसाधन व्यक्ति एवं प्रशिक्षक आरटीआई एक्टिविस्ट तथा अधिवक्ता डॉ. डी.के. सोनी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की विभिन्न धाराओं, सूचना प्रदान करने की समय-सीमा, अपवाद प्रावधान, प्रथम एवं द्वितीय अपील की प्रक्रिया तथा सूचना आयोग के महत्वपूर्ण निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरटीआई केवल सूचना देने का कानून नहीं, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कई व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से आवेदन निस्तारण की प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया।

कोरिया (बैकुंठपुर) की वनमंडलाधिकारी प्रभाकर खलखो ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम को लेकर आम नागरिकों के साथ-साथ कई बार अधिकारियों के बीच भी भ्रांतियां बनी रहती हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम इन भ्रांतियों को दूर करने के साथ सूचना मांगने वाले और सूचना उपलब्ध कराने वाले अधिकारियों के बीच बेहतर समझ विकसित करते हैं। इससे समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना आसान होता है तथा अनावश्यक विवाद और अपीलों की संख्या भी कम होती है।

कार्यक्रम में उपस्थित वनमंडलाधिकारियों, एसडीओ एवं रेंज अधिकारियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि बदलते कानूनी परिदृश्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। प्रतिभागियों ने माना कि इस प्रशिक्षण से आरटीआई आवेदनों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण में निश्चित रूप से सहायता मिलेगी।

कार्यशाला का समापन अधिकारियों द्वारा पारदर्शी प्रशासन, समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने और आरटीआई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के साथ हुआ। कार्यक्रम को सरगुजा वन वृत्त में प्रशासनिक दक्षता और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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