अवैध खनन और कोयला चोरी पर लगेगी लगाम, एसईसीएल ने शुरू किया विशेष प्रशिक्षण अभियान
एमएमडीआर एक्ट के तहत अधिकृत अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई, जांच और अभियोजन की दी जा रही जानकारी

बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय बिलासपुर स्थित प्रबंधन विकास संस्थान (एमडीआई) में अवैध कोयला खनन एवं कोयला चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से चार दिवसीय जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने किया। प्रशिक्षण 23 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
भारत सरकार की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार एसईसीएल, सीआईएसएफ, टीएसआर तथा मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) के अधिकारियों को खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 22, 23बी एवं 24 के अंतर्गत विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन अधिकारों के माध्यम से अधिकारी अवैध खनन और कोयला चोरी के मामलों में सीधे कार्रवाई करते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी विपुल शुक्ला विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दे रहे हैं। वर्तमान में वे बीसीसीएल में वरिष्ठ सलाहकार (सुरक्षा) के रूप में कार्यरत हैं। प्रशिक्षण के दौरान वे अधिकारियों को एमएमडीआर अधिनियम के विभिन्न कानूनी प्रावधानों, अवैध खनन और खनिज परिवहन से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, प्रकरण तैयार करने तथा मजबूत अभियोजन प्रतिवेदन तैयार करने की तकनीकी एवं कानूनी बारीकियों से अवगत करा रहे हैं।
चार दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्रीय सुरक्षा नोडल अधिकारी, महाप्रबंधक, एजेंट, प्रबंधक, मानव संसाधन एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सहित सीआईएसएफ, टीएसआर और एसआईएसएफ (मध्यप्रदेश) के कार्मिक विभिन्न बैचों में सहभागिता कर रहे हैं।
एसईसीएल प्रबंधन का मानना है कि इस प्रशिक्षण से अधिकृत अधिकारियों की कानूनी समझ और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी तथा अवैध खनन एवं कोयला चोरी की रोकथाम के लिए चलाए जाने वाले अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह पहल कोयला संपदा की सुरक्षा, राजस्व संरक्षण तथा खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



































