भूमि प्रबंधन में दक्षता बढ़ाने ईसीएल की पहल, राजस्व कार्मिकों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण शुरू

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सांकतोरिया। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) मुख्यालय में सतत भूमि प्रबंधन एवं परिचालन उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्व कार्मिकों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी एवं पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। भूमि राजस्व एवं संपदा (एलआरई) विभाग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण 22 जून से 24 जून 2026 तक चलेगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन ईसीएल के निदेशक (कार्मिक) श्री गुंजन कुमार सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर  महाप्रबंधक (एचआरडी), महाप्रबंधक (एलआरई) सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने खनन गतिविधियों के सुचारू संचालन, वैधानिक अनुपालन एवं हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में राजस्व कार्मिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण के प्रथम तकनीकी सत्र में महाप्रबंधक (एलआरई) सरोज कांती साहाना ने ईसीएल की भूमि अधिग्रहण एवं भूमि कब्जा संबंधी नीतियों की विस्तृत जानकारी देते हुए राजस्व कार्मिकों की जिम्मेदारियों एवं कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कोल माइंस (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम 1973 के विभिन्न प्रावधानों, उसकी पृष्ठभूमि तथा अधिनियम के तहत संपत्तियों के प्रबंधन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

इसके बाद वरिष्ठ प्रबंधक (एलआरई) दीपक कुमार हलदार ने भूमि अधिग्रहण, कब्जा प्राप्ति की प्रक्रियाओं तथा देवोत्तर, पीरोत्तर एवं पट्टा भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं दिन के अंतिम सत्र में वरिष्ठ प्रबंधक (सर्वेक्षण) के.सी. सामंता ने लीज क्षेत्र, खनन पट्टे, परियोजना सीमाओं, सुरक्षा क्षेत्र और राजस्व अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

ईसीएल प्रबंधन ने बताया कि आगामी सत्रों में भूमि एवं राजस्व क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे। इनमें उप मंडलीय भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी उत्पल साहा, पूर्व उप जिला भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी अब्दुल मन्नान, वरिष्ठ अधिवक्ता तपन चटर्जी तथा ईसीएल के उप प्रबंधक (एलआरई) इंद्रनील मुखर्जी शामिल होंगे।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राजस्व कर्मियों के तकनीकी ज्ञान, वैधानिक समझ और व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में ईसीएल की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भविष्य में बेहतर भूमि प्रबंधन एवं खनन कार्यों के प्रभावी संचालन में सहायक सिद्ध होगी।

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