12 वर्षों में एनसीएल की ऐतिहासिक उड़ान, कोयला उत्पादन दोगुना कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को दी नई शक्ति

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12 वर्षों में एनसीएल की ऐतिहासिक उड़ान, कोयला उत्पादन दोगुना कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को दी नई शक्ति

विश्वास, विकास और जनकल्याण के संकल्प के साथ तकनीकी उन्नयन, पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक विकास में रचे नए कीर्तिमान

सिंगरौली। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने बीते 12 वर्षों में उत्पादन, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की है। विश्वास, विकास और जनकल्याण के संकल्प को आधार बनाकर एनसीएल ने कोयला क्षेत्र में निरंतर प्रगति के नए आयाम स्थापित किए हैं।

वर्ष 2013-14 में जहां एनसीएल का वार्षिक कोयला उत्पादन 68 मिलियन टन था, वहीं वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 140 मिलियन टन का ऐतिहासिक उत्पादन दर्ज कर लगभग दोगुनी उपलब्धि हासिल की है। इसी प्रकार कोयला प्रेषण 72 मिलियन टन से बढ़कर 137 मिलियन टन तक पहुंच गया है। विद्युत क्षेत्र को होने वाली कोयला आपूर्ति भी 67 मिलियन टन से बढ़कर 118 मिलियन टन हो गई है, जिससे देश की बिजली उत्पादन क्षमता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण समर्थन मिला है।

तकनीकी आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भी एनसीएल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। कंपनी के पास वर्तमान में देश का सबसे बड़ा 23 ड्रैगलाइन वाला बेड़ा मौजूद है, जिसमें हाल ही में शामिल की गई स्वर्णा और शक्ति ड्रैगलाइन प्रमुख हैं। इसके साथ ही कंपनी ने आधुनिक खनन तकनीक को बढ़ावा देते हुए 20 घन मीटर क्षमता के शोवेल और 190 टन क्षमता के डंपर अपने बेड़े में शामिल किए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को प्रोत्साहन देते हुए एनसीएल ने स्वदेशी बीईएमएल द्वारा निर्मित भारी खनन उपकरणों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

कोयला परिवहन व्यवस्था को अधिक सक्षम और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों में विभिन्न परियोजनाओं में फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) प्रणाली के माध्यम से लगभग 65 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की वृद्धि की गई है, जिससे कोयले की ढुलाई अधिक तेज, सुरक्षित और प्रदूषण नियंत्रण के अनुकूल हुई है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एनसीएल ने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। कंपनी ने पिछले 12 वर्षों में 75 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया है। वहीं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को शून्य से बढ़ाकर 51.7 मेगावाट तक विकसित किया गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सामुदायिक विकास और जनकल्याण की दिशा में एनसीएल ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन किया है। बीते 12 वर्षों में कंपनी ने 5 हजार से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष भर्ती के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया है। साथ ही कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत लगभग 1,370 करोड़ रुपये खर्च कर शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आधारभूत सुविधाओं एवं सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्यों के माध्यम से करीब 10 लाख लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया है।

उत्पादन से लेकर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों तक, एनसीएल की 12 वर्षों की यह विकास यात्रा राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। आने वाले समय में भी कंपनी ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने तथा सतत विकास की दिशा में निरंतर अग्रसर रहने के लिए प्रतिबद्ध है।

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