कोयला क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिख रही ईसीएल, सीएसआर के जरिए स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास को मिला बढ़ावा
सांक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नया भारत’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए कोयला क्षेत्रों में विकास कार्यों का दायरा बढ़ाया है। कंपनी ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) व्यय का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अपनी खनन परियोजनाओं के 25 किलोमीटर दायरे में स्थित गांवों और क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित किया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईसीएल ने सीएसआर मद में निर्धारित 7.51 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले करीब 8.82 करोड़ रुपये खर्च किए, जो निर्धारित राशि का 117 प्रतिशत है। कंपनी द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार सृजन तथा ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए विशेष योजनाएं संचालित की गईं। स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश किया गया, जबकि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं, विशेषकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को रोजगार के लिए सक्षम बनाने का प्रयास किया गया।
ईसीएल द्वारा संचालित विकास योजनाओं में ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, व्यावसायिक प्रशिक्षण, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना तथा जलाशयों के पुनर्जीवन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों से पश्चिम बंगाल और झारखंड के खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
कंपनी की सीएसआर नीति केवल सहायता वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी क्षमताओं को विकसित करने पर आधारित है। यह रणनीति केंद्र सरकार के रोजगार सृजन, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप कार्य कर रही है।
ईसीएल पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। कंपनी द्वारा पारिस्थितिक संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा उत्तरदायी खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की जा रही हैं, जिससे औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जा सके।
कंपनी की आंतरिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्टों के अनुसार सीएसआर योजनाओं के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, शिक्षा के स्तर और आजीविका के अवसरों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। निदेशक मंडल की निगरानी एवं पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा रहा है।
पूर्वी भारत के संसाधन समृद्ध कोयला क्षेत्रों में ईसीएल विकास की एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उभर रही है। कंपनी की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, स्थानीय विकास और समावेशी प्रगति के भी मजबूत माध्यम बनकर ‘नया भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।




































