13 साल बाद मिला इंसाफ: हाईकोर्ट ने हत्या मामले में आधार सिंह व पूरन सिंह को किया बरी
वकील अभिषेक पाण्डेय की प्रभावी पैरवी बनी फैसला बदलने की वजह
अनूपपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 13 वर्ष पुराने चर्चित हत्या प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए अनूपपुर जिले के आधार सिंह और पूरन सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में असफल माना और अपील स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों को राहत प्रदान की।
वर्ष 2013 के इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी करते हुए तर्क दिया कि पूरे प्रकरण में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है तथा अभियोजन केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
उन्होंने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं था और चिकित्सकों ने चोटों को दुर्घटना से संबंधित माना था। वहीं कई महत्वपूर्ण गवाह भी सुनवाई के दौरान शत्रुतापूर्ण हो गए। अधिवक्ता पाण्डेय ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय शरद बर्डिचंद सरड़ा बनाम महाराष्ट्र राज्य का हवाला देते हुए कहा कि अधूरी परिस्थितिजन्य साक्ष्य श्रृंखला के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
खंडपीठ ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
इस फैसले को न्यायिक निष्पक्षता और अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय की मजबूत कानूनी पैरवी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


































