भारत सरकार के निर्देशानुसार बीसीसीएल में संचालित विशेष अभियान 6 के क्रियान्वयन चरण के अंतर्गत स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं जागरूकता से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज सेंट्रल हॉस्पिटल, धनबाद (सीएचडी) में बीसीसीएल की महिला कर्मियों के लिए ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम एवं शीघ्र पहचान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 52 महिला कर्मियों के ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जाँच की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला कर्मियों को ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर के जोखिम, रोकथाम, प्रारंभिक पहचान एवं आवश्यक स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम का संचालन सीएमओ (सीएचडी) डॉ. बंदना के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. अलका सिंह, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा डॉ. सबिता कुमारी, वरिष्ठ विशेषज्ञ, सर्जरी विभाग ने महिला कर्मियों के ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर की जांच की तथा इससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
चिकित्सकों ने ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जांच एवं प्रारंभिक पहचान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच एवं आवश्यक स्क्रीनिंग के माध्यम से स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान की जा सकती है, जिससे समय पर चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक उपचार की दिशा में कदम उठाना संभव होता है। इस दौरान सर्वाइकल कैंसर से बचाव में टीकाकरण की भूमिका एवं इसकी आवश्यकता पर भी जानकारी साझा की गई।
विदित हो कि ब्रेस्ट एवं कैंसर जागरूकता कार्यक्रम की इसी कड़ी में आगामी 16 अक्टूबर को सीएचडी के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में निःशुल्क पैप स्मीयर जांच शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिलाओं के ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की निःशुल्क जांच की जाएगी।
बीसीसीएल द्वारा विशेष अभियान 6 के क्रियान्वयन चरण के दौरान स्वच्छता एवं सुव्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं एवं सामाजिक सरोकारों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता को केवल अभियान की अवधि तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित व्यवहार एवं कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना है।







































































