ठेका प्रथा समाप्त कर नियमितीकरण की दिशा में ठोस पहल की जरूरत

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मनेन्द्रगढ़/झगराखाण्ड। पंजाब सरकार द्वारा बड़ी संख्या में अनियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय श्रमिक हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम माना जा रहा है। यह फैसला केवल रोजगार की स्थिरता तक सीमित नहीं है बल्कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है।

नगर पंचायत झगराखाण्ड की नेता प्रतिपक्ष हेमलता कोमल कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मचारी, प्लेसमेंट कर्मचारी और अन्य श्रमिक वर्ग पिछले कई दशकों से विभिन्न विभागों, नगरीय निकायों और संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने 20 से 40 वर्षों तक लगातार कार्य किया है लेकिन आज भी नियमितीकरण और स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। ऐसे में नियमितीकरण केवल रोजगार का विषय नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और श्रम सम्मान का भी प्रश्न है। विशेष रूप से सफाई कर्मचारी जो शहरों और गांवों को स्वच्छ बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार का लाभ मिलना चाहिये।

हेमलता कोमल कुमार ने कहा कि नियमितीकरण से कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी साथ ही शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता भी मजबूत होगी। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पंजाब की पहल से प्रेरणा लेते हुए छत्तीसगढ़ में भी दीर्घकालीन सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिये व्यापक और प्रभावी नीति बनाई जाये। उन्होंने कहा कि दशकों से जनता और शासन की सेवा कर रहे कर्मचारियों को सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य प्रदान करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। समय की मांग है कि राज्य सरकार इस दिशा में ठोस और ऐतिहासिक निर्णय लेकर लाखों श्रमिकों, सफाई कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों और संविदा कर्मियों के वर्षों के समर्पण का सम्मान करे।

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