ठेका मजदूरों के शोषण पर भड़के श्रीकांत शुक्ला, एसईसीएल निदेशक कार्मिक से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

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ठेका मजदूरों के शोषण पर भड़के श्रीकांत शुक्ला, एसईसीएल निदेशक कार्मिक से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

जमुना-कोतमा क्षेत्र की बरतराई अंडरग्राउंड खदान में वेतन घोटाले, पीएफ गड़बड़ी और सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप

अनूपपुर/बिलासपुर। एसईसीएल के जमुना-कोतमा क्षेत्र में ठेका कामगारों के वेतन भुगतान, पीएफ कटौती और खदान सुरक्षा में गंभीर अनियमितताओं को लेकर कोयला मजदूर सभा के अध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला ने एसईसीएल बिलासपुर के निदेशक (कार्मिक) को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

श्रीकांत शुक्ला ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जमुना-कोतमा क्षेत्र की बरतराई भूमिगत खदान, जिसे क्षेत्र की “रीढ़ और भविष्य” माना जाता है, वहां कार्यरत लगभग 200 ठेका मजदूरों को कंपनी द्वारा निर्धारित एचपीसी मानदेय 1350 रुपये के स्थान पर मात्र 300 से 400 रुपये प्रतिदिन देकर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संबंधित ठेकेदार न तो मजदूरों का पीएफ जमा कर रहे हैं और न ही उनके खातों की जानकारी दी जा रही है। जांच के डर से कुछ मजदूरों के खातों में औपचारिक रूप से राशि जमा कर स्टेटमेंट निकाला जाता है, फिर शेष राशि नौकरी से हटाने की धमकी देकर वापस ले ली जाती है।

श्रीकांत शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार प्रबंधन से सांठगांठ कर एलपीसी और लैंपरूम उपस्थिति रजिस्टर में अलग-अलग प्रविष्टियां तैयार करा रहे हैं, जिससे वास्तविक भूमिगत उपस्थिति और भुगतान में हेराफेरी की जा सके।

सबसे गंभीर आरोप जमुना 9/10 भूमिगत खदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगाया गया है। श्रीकांत शुक्ला के अनुसार खतरनाक पैनलों में रेडिएंट बोल्टिंग मशीन से किए जाने वाले रूफ सपोर्ट कार्य को ठेकेदार और प्रबंधन की मिलीभगत से गुणवत्ता विहीन तरीके से कराया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है और इसका खामियाजा ठेका व विभागीय कामगारों को भुगतना पड़ सकता है।

कोयला मजदूर सभा अध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला ने मांग की है कि एसईसीएल प्रबंधन ठेका कार्यों के ऑनलाइन आवंटन के साथ मजदूरों को निर्धारित वेतन पर्ची अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए, ताकि वेतन भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे और ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लग सके।

उन्होंने एसईसीएल निदेशक (कार्मिक) से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कंपनी नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

श्रीकांत शुक्ला ने कहा कि यदि ठेका मजदूरों के शोषण, वेतन गड़बड़ी और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो कोयला मजदूर सभा व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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