पायरी क्रमांक-1 में भ्रष्टाचार का पंचनामा: कागजों में हरी घास, जमीन पर सूखा सच
रिपोर्टर : मित्तल महरा
अनूपपुर। जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक-1 इन दिनों भ्रष्टाचार, अनियमितता और प्रशासनिक संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग, फर्जी भुगतान, अधूरे कार्यों को पूर्ण बताकर राशि आहरण और शिकायतों को दबाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं की राशि खुलेआम बंदरबांट की जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं।
ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक-1 में सामने आए ताजा मामलों ने यह साबित कर दिया है कि यहां सरकारी योजनाएं अब जनहित का माध्यम नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जरिया बन चुकी हैं। पंचायत में कागजों पर विकास कार्य पूरे दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से योजनाओं का पैसा निकालकर बंदरबांट किया जा रहा है, जबकि संबंधित अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रहे हैं।
कागजों में उगी घास, गौशाला में भूखी गौमाता
ग्राम पंचायत के सिद्धबाबा प्यारी स्थित गौशाला परिसर में चारागाह विकास के नाम पर बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। गौमाता के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु शासन द्वारा 4 लाख 32 हजार 180 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि का उद्देश्य गौशाला के आसपास चारागाह विकसित कर हरा चारा उपलब्ध कराना था, ताकि गौवंश को भोजन के लिए भटकना न पड़े।
लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार फाइलों में तो चारागाह विकसित कर हरी-भरी घास उगा दी गई, पर धरातल पर आज भी गौशाला के आसपास चारे का नामोनिशान नहीं है। गौमाता आज भी एक-एक तिनके के लिए भटक रही हैं। सवाल यह उठता है कि जब लाखों रुपये खर्च दिखाए जा चुके हैं तो फिर चारागाह कहां है? यदि कार्य अधूरा है, तो भुगतान किस आधार पर किया गया? और यदि भुगतान हुआ, तो जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में पंचायत स्तर से लेकर जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों तक की मिलीभगत है, जिसके चलते अब तक न तो राशि की वसूली हुई और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई।
सीएम हेल्पलाइन को भी बना दिया ‘फोर्स क्लोज’ का खेल
ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायत जब ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचाई, तब भी न्याय नहीं मिला। उल्टा शिकायत निवारण प्रणाली को ही मजाक बना दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में 5वें वित्त आयोग की राशि ग्रामसभा और पंचायत की स्वीकृति के बिना मनमाने तरीके से निकाली जा रही है।
इस संबंध में दर्ज सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 36843990 इसका बड़ा उदाहरण है। शिकायतकर्ता के अनुसार इस प्रकरण में पहले जो समाधान दर्ज किया गया था, उसे उच्च स्तर पर अमान्य कर दिया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिला स्तर के अधिकारियों ने उसी अमान्य समाधान को दोबारा मान्य मानते हुए शिकायत को जबरन ‘फोर्स क्लोज’ कर दिया।
यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि शिकायत निवारण प्रणाली के साथ खुला खिलवाड़ माना जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म का उपयोग भी अब भ्रष्टाचार छिपाने और शिकायतों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
खेत तालाब योजना में भी फर्जीवाड़ा, बिना खुदाई निकले 50 हजार
ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक-1 में भ्रष्टाचार का एक और मामला खेत तालाब योजना में सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में संतोष कुमार के नाम पर खेत तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। योजना के तहत खेत में तालाब निर्माण होना था, जिससे किसान को सिंचाई सुविधा मिल सके।
लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि संबंधित स्थल पर आज तक तालाब निर्माण का कोई कार्य शुरू ही नहीं हुआ। न मिट्टी की खुदाई हुई, न कोई संरचना बनी, फिर भी योजना के नाम पर 50 हजार रुपये की राशि निकाल ली गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना कार्य किए भुगतान कर दिया गया और अब कागजों में काम पूरा दिखाने की तैयारी की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन पर तालाब ही नहीं है तो फिर भुगतान किस आधार पर हुआ? और क्या अब रातों-रात गड्ढा खोदकर उसे ‘पूर्ण कार्य’ बताने की तैयारी की जा रही है?
जांच नहीं, संरक्षण दे रहा प्रशासन?
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन निष्पक्ष जांच के बजाय संबंधितों को संरक्षण दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते पंचायत के वित्तीय लेनदेन, निर्माण कार्यों और योजनाओं की तकनीकी जांच कराई जाए, तो करोड़ों के घोटाले उजागर हो सकते हैं। लेकिन प्रशासन की चुप्पी यह संकेत दे रही है कि भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि ऊपर तक फैली हुई हैं।
ग्रामीणों की मांग—प्रेस नोट जारी कर प्रशासन दे जवाब
ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक-1 के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले में तत्काल निष्पक्ष जांच टीम गठित की जाए, सभी विकास कार्यों की भौतिक सत्यापन जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जिला प्रशासन एक अधिकृत प्रेस नोट जारी कर यह स्पष्ट करे कि पंचायत में क्या सही हुआ, क्या गलत हुआ और किन मामलों में कार्रवाई प्रस्तावित है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में पारदर्शिता दिखाता है या फिर पायरी क्रमांक-1 का यह भ्रष्टाचार भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।

















































