127 दिन से हाथियों का आतंक: 5 गजराजों ने अनूपपुर में मचाया तांडव, 4 की मौत, कई घायल

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127 दिन से हाथियों का आतंक: 5 गजराजों ने अनूपपुर में मचाया तांडव, 4 की मौत, कई घायल

कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल

अनूपपुर, 03 मई। अनूपपुर जिले में बीते चार माह से जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। छत्तीसगढ़ की सीमा पार कर जिले में पहुंचे पांच हाथियों का दल इन दिनों दो अलग-अलग हिस्सों में बंटकर जैतहरी और अनूपपुर वन परिक्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में लगातार उत्पात मचा रहा है। हालात इतने भयावह हैं कि प्रभावित गांवों के लोग बीते कई सप्ताह से रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। हाथियों के हमले में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई ग्रामीण घायल हुए हैं। कई राहगीर भी बाल-बाल बचे हैं। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए वन विभाग अलर्ट मोड पर है और डीएफओ स्वयं रात भर मैदानी निगरानी कर रहे हैं।

जिले में इस समय कुल पांच हाथी सक्रिय हैं। इनमें तीन हाथियों का एक दल पिछले 127 दिनों से जिले में डेरा डाले हुए है। एक बड़ा दंतैल हाथी पिछले 30 दिनों से लगातार आतंक फैला रहा है, जबकि एक अन्य हाथी पिछले 13 दिनों से सक्रिय है। ये सभी हाथी अलग-अलग हिस्सों में विचरण करते हुए खेत, खलिहान, घर और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।

तीन हाथियों का दल 127 दिन से डटा, कई गांवों की फसल चौपट

तीन हाथियों का समूह बीते 127 दिनों से अनूपपुर जिले में विचरण कर रहा है। यह दल पिछले लगभग 20 दिनों से वन परिक्षेत्र जैतहरी के धनगवां बीट के जंगलों में डेरा डाले हुए है। यह क्षेत्र ग्राम पंचायत पड़रिया, कुकुरगोंड़ा और क्योंटार से लगा हुआ है। दिनभर जंगल में ठहरने के बाद यह दल रात होते ही गांवों की ओर निकल पड़ता है और खेतों, बाड़ियों तथा खलिहानों में रखी फसलों को नुकसान पहुंचाता है।

ग्रामीणों के अनुसार भलुवान टोला, पडमनियाटोला, चौकी टोला सहित पड़रिया क्षेत्र के कई किसानों की मेहनत पर हाथियों ने पानी फेर दिया है। रामेश्वर सिंह, चंगू सिंह, राम सिंह, संत कुमार, भूषण राठौर, चिंता राठौर और कमलेश सहित कई किसानों के खेतों में लगी फसलें हाथियों ने रौंद डालीं। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही हाथियों का भय इस कदर बढ़ जाता है कि पूरा गांव जागकर रात बिताने को मजबूर होता है।

एक दंतैल हाथी 30 दिन से बना मौत का कारण

सबसे अधिक दहशत एक अकेले आक्रामक दंतैल हाथी ने फैला रखी है। यह हाथी 3 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल के शिवनी बीट क्षेत्र से अनूपपुर जिले में दाखिल हुआ था। सीमा पार करने से पहले इसने मरवाही क्षेत्र में एक 55 वर्षीय ग्रामीण पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद यह हाथी अनूपपुर जिले के धनगवां बीट से प्रवेश कर जैतहरी और अनूपपुर वन परिक्षेत्र के कई गांवों में लगातार विचरण कर रहा है।

यह हाथी पिछले 30 दिनों से खांड़ा, पोड़ी, बरबसपुर, सोनमौहरी और सेंदुरी क्षेत्र के जंगलों व ग्रामीण बस्तियों में लगातार घूम रहा है। दिन में जंगल में छिपा रहता है और रात होते ही भोजन की तलाश में गांवों की ओर निकल आता है। इस हाथी ने 26 अप्रैल और 30 अप्रैल को दिन के समय एक महिला और एक युवती पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा राममनोज पाव, दीपक पाव और संतोष चर्मकार को घायल कर चुका है।

घर तोड़े, अनाज खाया, ग्रामीणों की नींद उड़ाई

आक्रामक हाथी का आतंक केवल खेतों तक सीमित नहीं है। यह हाथी अब घरों तक पहुंच रहा है। बीती रात ग्राम पंचायत सोनमौहरी के वार्ड क्रमांक-1 निवासी रामसहाय सिंह के कच्चे घर पर हाथी ने लगातार दो रात हमला किया। हाथी ने घर की दीवार तोड़ दी और अंदर रखे धान, अनाज, केला तथा गन्ना को खा गया। घर के परछी वाले हिस्से में रह रही मानसिक रूप से अस्वस्थ 55 वर्षीय चमानाबाई को हाथी ने सूंढ़ से सूंघा, लेकिन संयोगवश वह बाल-बाल बच गईं।

ग्रामीणों के अनुसार हाथी ने घर के आंगन में रखी एक बोरी धान भी फाड़कर खा ली और बाकी बिखेर दिया। इससे परिवार दहशत में है। ग्रामीणों का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।

राहगीरों पर भी मंडरा रहा खतरा

शनिवार की रात यह हाथी जिला मुख्यालय अनूपपुर से महज 7 किलोमीटर दूर सोनमौहरी बीट के बांस प्लांटेशन क्षेत्र में देखा गया। देर रात यह सेंदुरी-सोनमौहरी मुख्य मार्ग पर कई बार सड़क पर निकल आया। इस दौरान मोटरसाइकिल से गुजर रहे चार से पांच राहगीर हाथी के सामने आने से बाल-बाल बच गए। यदि समय रहते राहगीरों ने वाहन न रोके होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने रात में आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है और लोग अंधेरा होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

वन विभाग अलर्ट, डीएफओ खुद कर रहे निगरानी

जिले में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। अनूपपुर डीएफओ डेविड वेंकटराव स्वयं रात-रात भर मैदानी क्षेत्र में डटे हुए हैं और हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रख रहे हैं।

उनके साथ एसडीओ प्रकाश पखाले, वन परिक्षेत्र अधिकारी विवेक मिश्रा, अहिरगवां क्षेत्र के अधिकारी अजेन्द्र सिंह, वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल, वन विभाग की गश्ती टीम और स्थानीय ग्रामीण लगातार निगरानी में जुटे हैं। वन विभाग द्वारा नाइट विजन ड्रोन कैमरों की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

वन विभाग ग्रामीणों से लगातार अपील कर रहा है कि वे हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें, रात में अकेले बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। विभाग ने ग्रामीणों से “गजराज दल” एप से जुड़ने की भी अपील की है, ताकि हाथियों की लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सके।

दहशत में गांव, रातें बनीं पहरेदारी

हाथियों के लगातार बढ़ते हमलों ने ग्रामीण जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रभावित गांवों में लोग रात भर टॉर्च, ढोल और मशाल लेकर पहरा दे रहे हैं। महिलाएं और बच्चे भय के साए में जी रहे हैं। खेतों की रखवाली करना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी अब केवल वन क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सीधे मानव बस्तियों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। फिलहाल पूरा अनूपपुर वन अंचल गजराजों की दहशत में सांस ले रहा है।

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