टीबी मुक्त भारत अभियान में खड़गवां की बड़ी पहल, एमसीबी का विकासखंड बना रोल मॉडल

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टीबी मुक्त भारत अभियान में खड़गवां की बड़ी पहल, एमसीबी का विकासखंड बना रोल मॉडल

घर-घर स्क्रीनिंग से लेकर आधुनिक NAAT जांच तक तेज हुआ अभियान, WHO-जापाईगो की संयुक्त टीम ने परखी जमीनी स्थिति

एमसीबी। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (एमसीबी) जिले का खड़गवां विकासखंड क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयासों के साथ आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित चार विकासखंडों में खड़गवां को शामिल किया गया है। यहां टीबी की पहचान, जांच और उपचार को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
खड़गवां विकासखंड में वर्ष 2025 के दौरान टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में किये गये कार्यों और टीबी मुक्त पंचायतों के दावों की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिये केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संयुक्त टीम क्षेत्र में पहुंची है। मूल्यांकन टीम में राज्य के अधिकारियों के साथ वैश्विक स्वास्थ्य संस्था जापाईगो (Jhpiego) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम निर्धारित मापदंडों के आधार पर गांवों में टीबी नियंत्रण की स्थिति, जांच व्यवस्था और मरीजों की पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया का जमीनी स्तर पर परीक्षण कर रही है।

*घर-घर पहुंचकर हो रही संभावित मरीजों की पहचान*

टीबी की समय पर पहचान के लिये खड़गवां विकासखंड के विभिन्न गांवों में सक्रिय खोज अभियान (Active Case Finding) संचालित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जोखिम वाले क्षेत्रों और उच्च जोखिम समूहों को चिन्हित कर घर-घर पहुंच रही हैं। लोगों से टीबी के संभावित लक्षणों की जानकारी लेकर संदिग्ध मरीजों की जांच कराई जा रही है। जिन लोगों में टीबी के लक्षण पाये जाते हैं उनका तत्काल छाती का एक्स-रे और बलगम परीक्षण कराया जा रहा है। बीमारी की जल्द और सटीक पहचान के लिये NAAT (Nucleic Acid Amplification Test) जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। इससे शुरुआती स्तर पर टीबी की पुष्टि करने में मदद मिल रही है। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के साथ नियमित फॉलोअप और उपचार की निगरानी भी की जा रही है ताकि मरीज बीच में इलाज ना छोड़े और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

*प्रति हजार आबादी पर एक या उससे कम मरीज का लक्ष्य*

टीबी मुक्त विकासखंड के लिये निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी पर नोटिफाइड टीबी मरीजों की संख्या एक या उससे कम होना आवश्यक है। हालांकि केवल मरीजों की संख्या कम होना ही टीबी मुक्त होने का प्रमाण नहीं माना जाता। मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि संभावित मरीजों की पहचान के लिये पर्याप्त स्तर पर जांच की गई है या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि जांच के अभाव में कोई संभावित टीबी मरीज छूट ना जाये। इसी उद्देश्य से स्क्रीनिंग, एक्स-रे, बलगम जांच और आधुनिक मॉलिक्यूलर टेस्ट को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

*स्वास्थ्य अमले की मेहनत से मजबूत हुआ अभियान*

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि खड़गवां विकासखंड को टीबी मुक्त बनाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग का उद्देश्य केवल आंकड़ों में मरीजों की संख्या कम करना नहीं बल्कि प्रत्येक संभावित मरीज तक पहुंचकर उसकी जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर स्क्रीनिंग कराई जा रही है। आधुनिक NAAT मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं से टीबी की पहचान में तेजी आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि खड़गवां में संचालित सघन अभियान और बेहतर उपचार व्यवस्था के आधार पर विकासखंड टीबी मुक्ति के निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश है कि टीबी की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इसी संकल्प के साथ खड़गवां में “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” के संदेश को जमीनी स्तर पर साकार करने का प्रयास जारी है।

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घर-घर स्क्रीनिंग से लेकर आधुनिक NAAT जांच तक तेज हुआ अभियान, WHO-जापाईगो की संयुक्त टीम ने परखी जमीनी स्थिति

एमसीबी। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (एमसीबी) जिले का खड़गवां विकासखंड क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयासों के साथ आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित चार विकासखंडों में खड़गवां को शामिल किया गया है। यहां टीबी की पहचान, जांच और उपचार को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
खड़गवां विकासखंड में वर्ष 2025 के दौरान टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में किये गये कार्यों और टीबी मुक्त पंचायतों के दावों की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिये केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संयुक्त टीम क्षेत्र में पहुंची है। मूल्यांकन टीम में राज्य के अधिकारियों के साथ वैश्विक स्वास्थ्य संस्था जापाईगो (Jhpiego) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम निर्धारित मापदंडों के आधार पर गांवों में टीबी नियंत्रण की स्थिति, जांच व्यवस्था और मरीजों की पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया का जमीनी स्तर पर परीक्षण कर रही है।

*घर-घर पहुंचकर हो रही संभावित मरीजों की पहचान*

टीबी की समय पर पहचान के लिये खड़गवां विकासखंड के विभिन्न गांवों में सक्रिय खोज अभियान (Active Case Finding) संचालित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जोखिम वाले क्षेत्रों और उच्च जोखिम समूहों को चिन्हित कर घर-घर पहुंच रही हैं। लोगों से टीबी के संभावित लक्षणों की जानकारी लेकर संदिग्ध मरीजों की जांच कराई जा रही है। जिन लोगों में टीबी के लक्षण पाये जाते हैं उनका तत्काल छाती का एक्स-रे और बलगम परीक्षण कराया जा रहा है। बीमारी की जल्द और सटीक पहचान के लिये NAAT (Nucleic Acid Amplification Test) जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। इससे शुरुआती स्तर पर टीबी की पुष्टि करने में मदद मिल रही है। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के साथ नियमित फॉलोअप और उपचार की निगरानी भी की जा रही है ताकि मरीज बीच में इलाज ना छोड़े और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

*प्रति हजार आबादी पर एक या उससे कम मरीज का लक्ष्य*

टीबी मुक्त विकासखंड के लिये निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी पर नोटिफाइड टीबी मरीजों की संख्या एक या उससे कम होना आवश्यक है। हालांकि केवल मरीजों की संख्या कम होना ही टीबी मुक्त होने का प्रमाण नहीं माना जाता। मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि संभावित मरीजों की पहचान के लिये पर्याप्त स्तर पर जांच की गई है या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि जांच के अभाव में कोई संभावित टीबी मरीज छूट ना जाये। इसी उद्देश्य से स्क्रीनिंग, एक्स-रे, बलगम जांच और आधुनिक मॉलिक्यूलर टेस्ट को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

*स्वास्थ्य अमले की मेहनत से मजबूत हुआ अभियान*

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि खड़गवां विकासखंड को टीबी मुक्त बनाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग का उद्देश्य केवल आंकड़ों में मरीजों की संख्या कम करना नहीं बल्कि प्रत्येक संभावित मरीज तक पहुंचकर उसकी जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर स्क्रीनिंग कराई जा रही है। आधुनिक NAAT मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं से टीबी की पहचान में तेजी आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि खड़गवां में संचालित सघन अभियान और बेहतर उपचार व्यवस्था के आधार पर विकासखंड टीबी मुक्ति के निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश है कि टीबी की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इसी संकल्प के साथ खड़गवां में “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” के संदेश को जमीनी स्तर पर साकार करने का प्रयास जारी है।

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