स्टेशन रोड बना पार्किंग अड्डा, नियमों की सरेआम उड़ रही धज्जियां

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स्टेशन रोड बना पार्किंग अड्डा, नियमों की सरेआम उड़ रही धज्जियां

 

 

मनेन्द्रगढ़। शहर के रेलवे स्टेशन रोड स्थित नो-पार्किंग क्षेत्र में चार पहिया वाहनों की लगातार हो रही अवैध पार्किंग अब आम नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। नियमों की खुलेआम अनदेखी के चलते सड़क पर जाम जैसे हालात बन रहे हैं, जिससे राहगीरों और यात्रियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या अब स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रही है।

 

ओवरब्रिज के पास बिगड़ते हालात, नियमों की उड़ रही धज्जियां:

 

इसी गंभीर समस्या को लेकर पत्रकार आनंद शर्मा, निवासी मनेन्द्रगढ़, ने 05 मई 2026 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सहायक मंडल अभियंता को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे स्टेशन रोड, ओवरब्रिज के समीप स्थित नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहनों का अवैध जमावड़ा लगा रहता है।

यहां स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। वाहन चालकों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और आम नागरिकों को रोजाना जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।

 

आयोजनों के दौरान बढ़ता दबाव, दुर्घटना की आशंका:

 

स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब राजस्थान भवन में विवाह एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन चालक सड़क को ही पार्किंग स्थल बना देते हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।

चिंता की बात यह है कि 6 मई से 12 मई 2026 तक राजस्थान भवन में मेला व अन्य बड़े आयोजन प्रस्तावित हैं। ऐसे में वाहनों की संख्या में वृद्धि होना तय है, जिससे पहले से ही बदहाल यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराने का खतरा बना हुआ है।

हालांकि, इस मुद्दे को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने रेलवे सुरक्षा बल और सहायक मंडल अभियंता को आवेदन की प्रतिलिपि संबंधित विभाग को भी सौंप दी है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि नो-पार्किंग क्षेत्र में सख्ती से नियमों का पालन कराया जाए, अवैध पार्किंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

 

 जिम्मेदारी तय करना जरूरी:

 

यह मामला केवल अवैध पार्किंग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। जब लगातार शिकायतें और खबरें सामने आ रही हैं, तब भी कार्रवाई का अभाव यह दर्शाता है कि जिम्मेदार विभाग अपनी भूमिका निभाने में असफल हो रहे हैं।

जरूरत है कि रेलवे प्रशासन, स्थानीय पुलिस और नगर प्रशासन मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। विशेष आयोजनों के दौरान अस्थायी पार्किंग व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और सख्त कार्रवाई जैसे कदम उठाना समय की मांग है।

पत्रकारिता ने एक बार फिर जनहित के इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक चुप्पी साधे रहते हैं और आखिरकार आम जनता को राहत कब मिलती है।

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