संस्कृत जगत के प्रख्यात मनीषी डॉ. मोहनानंद मिश्र का निधन, शिक्षा और संस्कृति जगत में शोक की लहर
जिले के पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि, कहा— संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा ने खोया अपना महान प्रहरी
अनूपपुर। संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और शिक्षा जगत के प्रख्यात विद्वान, बैद्यनाथ वाङ्मय ग्रंथ के रचयिता, बालानंद संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य तथा हिंदी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. मोहनानंद मिश्र का देवघर में निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही संस्कृत साहित्य, शिक्षा जगत, सामाजिक एवं पत्रकारिता क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया। वे जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक आर्यावर्त के स्थानीय संपादक संतोष झा के ससुर एवं धर्मपिता थे।
डॉ. मोहनानंद मिश्र ने अपना संपूर्ण जीवन संस्कृत भाषा के संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन तथा शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित किया। वे केवल एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के सशक्त संवाहक, ओजस्वी वक्ता, उत्कृष्ट लेखक और उच्च कोटि के संस्कृत मनीषी के रूप में देशभर में सम्मानित थे। उनके व्यक्तित्व में विद्वता, सादगी, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता था।
संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। उनके द्वारा रचित बैद्यनाथ वाङ्मय ग्रंथ सहित अनेक साहित्यिक एवं शैक्षणिक कृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक का कार्य करती रहेंगी। उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन में हजारों विद्यार्थियों को संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक किया और अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। शिक्षा प्रशासन में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए विभिन्न संस्थानों को नई दिशा प्रदान की।
डॉ. मिश्र के निधन पर जिले के पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि संपूर्ण संस्कृत जगत, शिक्षा जगत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने ज्ञान, लेखन और शिक्षण के माध्यम से समाज को जो वैचारिक संपदा प्रदान की है, वह सदैव अमूल्य धरोहर बनी रहेगी। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का कार्य करता रहेगा।
पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही भगवान से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार, विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकार संतोष झा एवं समस्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहनानंद मिश्र का जीवन ज्ञान, सेवा और संस्कारों की ऐसी अमूल्य विरासत छोड़ गया है, जिसे समाज सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करता रहेगा।



































