सड़क पर अकेली थी… फिर मदद के हाथ बढ़े
कक्का की चौपाल का असर : वन स्टॉप सेंटर के बाद मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफरकैलाश पाण्डेय
भालूमाड़ा, अनूपपुर। कई दिनों से सड़क किनारे भटक रही एक अज्ञात महिला की जिंदगी शायद राहगीरों की नजरों के सामने ही सिमटकर रह गई थी। लोग आते-जाते रहे, उसे देखते रहे, लेकिन उसकी बेबसी को सहारा देने वाला कोई सामने नहीं आया। न कोई अपना दिखाई दिया और न कोई ऐसा, जिसके सामने वह अपनी पीड़ा कह सके। इसी महिला की दर्दभरी स्थिति को जब कक्का की चौपाल में प्रमुखता से उठाया गया तो मामला केवल एक खबर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके बाद मदद के हाथ भी आगे बढ़े
कलेक्टर रत्नाकर झा के निर्देशन में जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग अनूपपुर संजीता भगत तथा भालूमाड़ा थाना प्रभारी राधिका भगत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला की सहायता के लिए आवश्यक कार्रवाई की। पुरानी नगर पालिका के सामने गुप्ता होटल के पास कई दिनों से भटक रही अज्ञात महिला को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए काउंसलर प्रतिभा पाण्डेय, पुलिस महिला स्टाफ तथा महिला आरक्षक शैलू मिश्रा मौके पर पहुंचे और महिला को वहां से लाकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचायावन स्टॉप सेंटर में महिला की आवश्यक जांच और देखभाल की गई। उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आगे चिकित्सकीय उपचार के लिए उसे मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर किया गया। सड़क किनारे असहाय अवस्था में भटक रही इस महिला के लिए यह कार्रवाई महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उसकी बेबसी से उसे उपचार और संरक्षण की ओर ले जाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल थी। हालांकि उसकी पहचान अभी सामने नहीं आई है और उसके परिजनों की तलाश तथा आगे के सुरक्षित पुनर्वास की जरूरत बनी हुई है।
इससे पहले वार्ड क्रमांक-18 के पार्षद इन्द्रलाल केवट ने भी महिला की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, अनूपपुर को पत्र देकर उसकी देखभाल, उपचार और पुनर्वास की मांग की थी। पार्षद की पहल, कक्का की चौपाल में उठी आवाज और प्रशासन तथा पुलिस की कार्रवाई ने मिलकर उस महिला तक मदद पहुंचाने का रास्ता बनाया, जो कई दिनों से सड़क किनारे अपनी बेबसी के साथ भटक रही थीदरअसल, कक्का की चौपाल में इस महिला की पीड़ा के साथ अनूपपुर जिले के शहरी क्षेत्रों की एक बड़ी तस्वीर भी सामने रखी गई थी। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग कई बार असहाय अवस्था में भटकते दिखाई देते हैं। रेलवे स्टेशनों के फुटओवर ब्रिज के दोनों ओर भी ऐसे दृश्य लोगों की आंखों के सामने आते रहते हैं। सवाल यही है कि जब कोई असहाय व्यक्ति हमारी आंखों के सामने मदद की उम्मीद में भटक रहा हो, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? समाजसेवा केवल भाषणों और कागजी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति तक उस समय पहुंचनी चाहिए, जब उसे वास्तव में सहारे की जरूरत हो
इस महिला के मामले में हुई कार्रवाई निश्चित रूप से राहत देने वाली है। एक असहाय महिला को सड़क की बेबसी से निकालकर वन स्टॉप सेंटर तक पहुंचाया गया और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर किया गया। अब जरूरत इस बात की है कि उसके उपचार के साथ उसकी पहचान और परिजनों की तलाश भी की जाए तथा यदि परिजन नहीं मिलते हैं तो उसके सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वह फिर उसी सड़क पर लौटने के लिए मजबूर न हो।
इस पूरे घटनाक्रम में एक मानवीय तस्वीर सामने आती है कक्का की चौपाल ने सवाल उठाया, वार्ड क्रमांक-18 के पार्षद इन्द्रलाल केवट ने पहल की, कलेक्टर रत्नाकर झा के निर्देशन में जिला कार्यक्रम अधिकारी संजीता भगत और थाना प्रभारी राधिका भगत ने मामले को गंभीरता से लिया तथा काउंसलर प्रतिभा पाण्डेय, महिला आरक्षक शैलू मिश्रा और पुलिस महिला स्टाफ ने महिला को सड़क से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। यह पहल उस सोच को मजबूत करती है कि किसी असहाय व्यक्ति को देखकर केवल गुजर जाना ही हमारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके लिए मदद का हाथ बढ़ाना भी समाज और व्यवस्था दोनों की मानवीय जिम्मेदारी है
लेकिन सवाल अभी भी बाकी है सड़क, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भटक रहे उन दूसरे असहाय चेहरों का क्या, जो आज भी किसी की नजर पड़ने और किसी के मदद के लिए आगे आने का इंतजार कर रहे हैं? कितने लोग ऐसे हैं, जिनकी अपनी कोई आवाज नहीं है और जिनकी पीड़ा भीड़ में कहीं खो जाती है? क्योंकि सवाल भविष्य का नहीं, आज का है। ये लोग आज हमारे सामने हैं, आज हमारी आंखों के सामने भटकते हैं और आज ही हमारी व्यवस्था तथा समाज से मदद की उम्मीद रखते हैं। किसी एक महिला तक पहुंची मदद अगर ऐसे दूसरे चेहरों तक भी पहुंचने की वजह बन जाए, तो शायद सड़क किनारे खड़ी बेबसी की तस्वीर धीरे-धीरे बदल सकती है।
सड़क पर अकेली थी… फिर मदद के हाथ बढ़े कक्का की चौपाल का असर : वन स्टॉप सेंटर के बाद मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर
By: संतोष चौरसिया संपादक (कोयलांचल न्यूज )
On: Monday, September 21, 2026 1:46 PM


































































