रक्षाबंधन को लेकर कोतमा बाजार में बढ़ी रौनक, रंग-बिरंगी राखियों से सजा बाजार
रिपोर्टर भरत मिश्रा, कोतमा

कोतमा। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही कोतमा नगर सहित पूरे कोयलांचल क्षेत्र के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। रक्षाबंधन पर्व में अब करीब एक सप्ताह शेष है और बाजार रंग-बिरंगी, आकर्षक एवं फैंसी राखियों से सज गए हैं। शहर के थोक एवं फुटकर बाजारों में राखियों की खरीदारी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से भी व्यापारी पहुंचने लगे हैं।
इस बार राखियों की नई-नई डिजाइन और वैरायटी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। स्टोन, जरकन, मेटल, रेशम, मोती, कलावा, रुद्राक्ष सहित विभिन्न प्रकार की फैंसी राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें स्टोन और रेशम की राखियों की मांग सबसे अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा स्टाइलिश ब्रेसलेट राखी, लुंबा राखी, डोरी राखी तथा भैया-भाभी राखी भी खरीदारों की पसंद बनी हुई है।
कोलकाता, गुजरात और दिल्ली से पहुंच रहा राखियों का स्टॉक
थोक कारोबारियों के अनुसार राखियों की तैयारी और खरीदारी कई महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। बंगाल, गुजरात सहित देश के अन्य प्रमुख शहरों में राखियां तैयार होती हैं, जबकि कोतमा के व्यापारी दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और कोलकाता से राखियों का स्टॉक मंगा रहे हैं। थोक व्यापारी नियामुद्दीन ने बताया कि इस बार थोक में एक रुपये से लेकर करीब 130 रुपये तक की राखियां उपलब्ध हैं, जबकि फुटकर बाजार में पांच रुपये से लेकर 200 रुपये तक की राखियां बिक रही हैं।
थोक राखी कारोबारी संजय कुमार जैन ने बताया कि रक्षाबंधन में अभी एक सप्ताह शेष है, लेकिन गांव और ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों ने थोक में राखियों की खरीदारी शुरू कर दी है। इस बार रेशम और स्टोन की राखियों की मांग अधिक है, इसलिए थोक में इनकी विभिन्न डिजाइन मंगाई गई हैं।
थोक राखी विक्रेता विष्णु सोनी के मुताबिक इस बार मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली से बड़ी मात्रा में राखियां बाजार में पहुंची हैं। राखियों के दाम में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिल रही है।
बच्चों के लिए भी राखियों की कई वैरायटी
बाजार में बच्चों को आकर्षित करने के लिए भी अलग-अलग डिजाइन की राखियां उपलब्ध हैं। टैडी, छोटा भीम, डोरेमोन, पावजी सहित कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां बच्चों की पसंद बनी हुई हैं। इसके अलावा युवाओं के लिए आकर्षक ब्रेसलेट और स्टाइलिश राखियों की भी अच्छी मांग देखी जा रही है।
थोक बाजार में 10 रुपये से लेकर 300 रुपये तक की राखियां उपलब्ध हैं, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अधिकांश दुकानदार 10 से 20 रुपये कीमत वाली राखियों की खरीदारी अधिक कर रहे हैं। डोरी और लुंबा राखियों की भी मांग बनी हुई है।
महंगाई का असर, 20 प्रतिशत तक बढ़े दाम
राखी कारोबारियों का कहना है कि राखी तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का असर इस बार राखियों के दाम पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राखियों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं रक्षाबंधन पर उपयोग होने वाले नारियल, सोनपापड़ी, लड्डू सहित अन्य मिठाइयों के दामों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
लगातार बारिश के कारण फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले फुटकर व्यापारियों की संख्या कुछ कम है। इसके बावजूद व्यापारियों को त्योहारी सीजन में ग्राहकों की संख्या बढ़ने और कारोबार बेहतर रहने की उम्मीद है।
ऑनलाइन बाजार से स्थानीय कारोबारियों की चिंता
राखी कारोबारियों के सामने ऑनलाइन बाजार भी बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि लोग अब घर बैठे ऑनलाइन राखियां मंगाना पसंद कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार प्रभावित हो रहा है। हालांकि त्योहारी खरीदारी के दौरान स्थानीय बाजार में राखी खरीदने की परंपरा अभी भी मजबूत बनी हुई है।
व्यापारियों के अनुसार दूर-दराज या दूसरे शहरों में रहने वाले भाइयों को बहनें डाकघर, स्पीड पोस्ट और कुरियर के माध्यम से राखियां भेज रही हैं। वहीं भाई भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी बहनों के लिए उपहार भेजने लगे हैं। समय के साथ रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन भाई-बहन के स्नेह और भावनाओं से जुड़े इस पर्व का उत्साह आज भी बरकरार है।
चीनी राखियों से दूरी, भारतीय उत्पादों पर जोर
स्थानीय राखी कारोबारियों का कहना है कि इस बार व्यापारियों का रुझान भारतीय निर्मित राखियों की ओर अधिक है। कई व्यापारी चाइनीज राखियों से दूरी बनाते हुए बंगाल, गुजरात और देश के अन्य हिस्सों में तैयार होने वाली राखियों को बाजार में ला रहे हैं। स्टोन, रेशम, मेटल और मोतियों से बनी राखियों की मांग को देखते हुए व्यापारियों ने इनका पर्याप्त स्टॉक किया है।
रक्षाबंधन के लिए जैसे-जैसे दिन नजदीक आ रहे हैं, कोतमा के बाजारों में ग्राहकों और ग्रामीण दुकानदारों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों को भरोसा है कि त्योहार के अंतिम दिनों में राखी की बिक्री में और तेजी आएगी और इस बार कारोबार बेहतर रहेगा।












































