प्यारी पंचायत में लाखों के विकास कार्यों पर सवाल

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प्यारी पंचायत में लाखों के विकास कार्यों पर सवाल

₹4.32 लाख के चारागाह का धरातल पर नहीं मिला अस्तित्व, मानकविहीन सोख पिट से पेयजल स्रोतों पर खतरे के आरोप

ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, तकनीकी प्रतिवेदन पर भी खड़े हुए सवाल

अनूपपुर। जनपद पंचायत अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत प्यारी क्रमांक-1 में मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकारी अभिलेखों में लाखों रुपये के कार्य दर्शाए गए हैं, लेकिन कई कार्यों की वास्तविक स्थिति कागजों से मेल नहीं खाती। मामले को लेकर ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा के तहत “गौशाला चारागाह सिद्धबाबा प्यारी क्रमांक-1” नामक कार्य पर लगभग ₹4 लाख 32 हजार 180 की राशि व्यय दर्शाई गई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर चारागाह विकास कार्य का अपेक्षित स्वरूप दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि कार्य की गुणवत्ता एवं व्यय की वास्तविकता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी दर्ज कराई गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद प्रस्तुत तकनीकी प्रतिवेदन में जमीनी स्थिति का समुचित परीक्षण नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यदि चारागाह विकास, चारा क्रय, यूरिया, डीएपी एवं अन्य सामग्री की खरीदी वास्तव में हुई है तो संबंधित बिल, भुगतान अभिलेख एवं आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

विवाद केवल चारागाह तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने 15वें वित्त आयोग के टाइड फंड से निर्मित सोख पिटों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई स्थानों पर सोख पिट निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं। आरोप है कि हैंडपंपों के समीप निर्मित इन संरचनाओं में आवश्यक फिल्टरिंग सामग्री का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया, जिससे भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है और यदि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों एवं भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

इस पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई तो वे उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ मामले को उच्च जांच एजेंसियों के समक्ष ले जाएंगे। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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