पर्यावरण संरक्षण के संदेश से गूंजा साहित्य का मंच

---Advertisement---

प्रकृति महिला उत्थान समिति के आंगन में आयोजित हुई साहित्यिक संगोष्ठी

मनेन्द्रगढ़। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से प्रकृति महिला उत्थान समिति द्वारा साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, समाज और मानव जीवन के संबंधों पर गहन विचार व्यक्त किया।

संगोष्ठी का शुभारंभ देश के प्रख्यात साहित्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और स्वच्छ पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना अधूरी है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार विनोद तिवारी ने वैश्विक परिस्थितियों और प्रकृति के बदलते स्वरूप पर अपनी रचना के माध्यम से चिंता व्यक्त की। हास्य कवि पुष्कर तिवारी ने वृक्षों को जीवनदाता बताते हुए उनके परोपकारी स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन किया।

कवि श्याम सुंदर निगम ने पेड़ों की कटाई और भौतिक सुविधाओं की बढ़ती लालसा से बिगड़ते पर्यावरण पर अपनी बात रखी। समाजसेवी और कवि मृत्युंजय सोनी ने सामाजिक विषमताओं को अपनी रचनाओं में उकेरा वहीं कवि नारायण तिवारी ने सामाजिक कुरीतियों और संवेदनशील मुद्दों पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की।

श्रवण कुमार उर्मलिया ने अपने प्रकृति चित्रण से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि वीरेंद्र श्रीवास्तव, व्यंगकार जगदीश पाठक और अन्य साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को सार्थक बनाया। अंत में कवि राजेश बुंदेली ने बदलते पर्यावरण और विलुप्त होती प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भावनात्मक समापन किया।

इस अवसर पर श्रवण कुमार उर्मलिया, जगदीश पाठक, विनोद तिवारी, नारायण तिवारी, श्याम सुंदर निगम, मृत्युंजय सोनी, वीरेंद्र श्रीवास्तव, पुष्कर लाल तिवारी, राजेश जैन बुंदेली, आशा जैन सहित कई साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment