प्रकृति के संतुलन के लिए सांपों का संरक्षण जरूरी, सर्पों से डरें नहीं बल्कि उन्हें समझें – सीसीएफ एमपी सिंह

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कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल

 

अनूपपुर। अनूपपुर वन मंडल द्वारा किरर वन चौकी परिसर में एक दिवसीय सर्प जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक शहडोल एमपी सिंह ने कहा कि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में सांपों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सांपों का संरक्षण आवश्यक है और सर्पदंश की घटनाओं को कम करने के लिए आम लोगों में जागरूकता, सतर्कता एवं सही जानकारी का होना बेहद जरूरी है।

 

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के सर्प वैज्ञानिक डॉ. जिज्ञासु डोलिया एवं सर्प अध्ययनकर्ता मयंक बागची ने सर्पों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी पहचान, स्वभाव, रहन-सहन और पर्यावरण में उनकी भूमिका की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सांप प्रकृति की खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चूहों सहित कई हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।

 

विशेषज्ञों ने बताया कि मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से भारतीय नाग (कोबरा), कॉमन करैत, बैंडेड करैत और रसेल वाइपर जैसे विषैले सर्प पाए जाते हैं, जबकि अजगर, धामन, बैंडेड कुकरी, सीतालट सहित कई प्रजातियां विषहीन होती हैं। उन्होंने बताया कि सांप बिना कारण किसी पर हमला नहीं करते और स्वयं को खतरा महसूस होने पर ही बचाव स्वरूप काटते हैं।

 

सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को घबराने के बजाय शांत रखकर तुरंत नजदीकी शासकीय चिकित्सालय पहुंचाना चाहिए। सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीवेनम औषधि सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध रहती है। अंधविश्वास और झाड़-फूंक में समय गंवाना मरीज के लिए घातक साबित हो सकता है।

 

कार्यक्रम में वन मंडलाधिकारी अनूपपुर डेविड बेंकटराव चनाप ने कहा कि सर्पों का संरक्षण जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सर्प मित्रों द्वारा किए जा रहे जनहित कार्यों की सराहना की।

 

जिला मुख्यालय के सर्प प्रहरी शशिधर अग्रवाल ने बताया कि अनूपपुर जिले के लगभग 20 सर्पमित्र कई वर्षों से स्वेच्छा से घरों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने वाले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़ने का कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2026 में जनवरी से जून मध्य तक जिले में लगभग 190 सर्पों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें सर्वाधिक संख्या भारतीय नाग (कोबरा) प्रजाति की रही है। उन्होंने बताया कि जिले में कॉमन करैत के दंश से प्रतिवर्ष कई लोगों की मृत्यु होती है, जबकि समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक लोगों की जान बच जाती है।

 

कार्यशाला में एसडीओ वन अनूपपुर प्रकाश मनोहर पखाले, जिले के सभी वन परिक्षेत्र अधिकारी, वनरक्षक एवं बड़ी संख्या में सर्पमित्र उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी सात वन परिक्षेत्र अधिकारियों को स्नेक रेस्क्यू किट प्रदान की गई तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किरर वन चौकी परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

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