पायरी के आसपास किराना दुकानों में शराब परोसने का आरोप, आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

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पायरी के आसपास किराना दुकानों में शराब परोसने का आरोप, आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

मित्तल महरा की रिपोर्ट

पायरी। थाना भालूमाड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक 1 के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की कथित अवैध बिक्री और किराना दुकानों से शराब परोसे जाने का मामला चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है और कुछ किराना दुकानों पर भी शराब परोसे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों के अनुसार जमुना शराब ठेके से शराब पायरी सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रही है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर किराना दुकानों की आड़ में लोगों को शराब उपलब्ध कराई जा रही है।

किराना दुकानों पर शराब पहुंचने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य तौर पर किराना दुकानों से घरेलू उपयोग की सामग्री की बिक्री होती है, लेकिन यदि इन्हीं दुकानों पर शराब भी उपलब्ध कराई जा रही है तो यह गंभीर जांच का विषय है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों में यदि नियमित रूप से शराब उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठता है। शराब की बिक्री और लाइसेंस प्राप्त दुकानों की गतिविधियों की निगरानी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पायरी और आसपास के गांवों में अवैध रूप से शराब की बिक्री अथवा परोसने का काम हो रहा है, तो आबकारी विभाग द्वारा समय-समय पर औचक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने आबकारी विभाग से मांग की है कि पायरी पंचायत और आसपास के गांवों में औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाए। किराना दुकानों की जांच के साथ यह भी पता लगाया जाए कि यदि कहीं शराब उपलब्ध कराई जा रही है तो उसकी आपूर्ति कहां से हो रही है।

साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि शराब ठेके की बिक्री व्यवस्था, संबंधित लाइसेंस की शर्तों और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब पहुंचने की शिकायतों की भी जांच की जाए। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

  • फिलहाल ग्रामीणों की शिकायतों ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की उपलब्धता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में शराब की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल लाइसेंसी शराब दुकान की निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली कथित अवैध बिक्री पर भी नियमित निगरानी आवश्यक है।

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