आईजीएनटीयू में सुपरकंप्यूटिंग की नई तकनीकों से रूबरू हुए विद्यार्थी, एआई और वैज्ञानिक अनुसंधान में एचपीसी की बढ़ती भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

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आईजीएनटीयू में सुपरकंप्यूटिंग की नई तकनीकों से रूबरू हुए विद्यार्थी, एआई और वैज्ञानिक अनुसंधान में एचपीसी की बढ़ती भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक स्थित राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) नोडल केंद्र एवं कंप्यूटर विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “High-Performance Computing Awareness for Computer Science Students” विषय पर एक दिवसीय हाइब्रिड तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आईजीएनटीयू के साथ डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के यूजी एवं पीजी विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।

एआई और बड़े डेटा के दौर में सुपरकंप्यूटिंग महत्वपूर्ण आधार : प्रो. शुक्ल

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईजीएनटीयू के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बड़े डेटा और वैज्ञानिक अनुसंधान के तेजी से विस्तार के दौर में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। जटिल एआई मॉडल, बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग तथा वैज्ञानिक गणनाओं के लिए सुपरकंप्यूटिंग तकनीक एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों और उन्नत कंप्यूटिंग से जोड़कर उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।

विद्यार्थियों को मिला सुपरकंप्यूटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण

NSM नोडल केंद्र के समन्वयक डॉ. नारायण पी. भोसले ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच सुपरकंप्यूटिंग की जटिल अवधारणाओं को सरल, सहज और व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत करना था। उन्होंने बताया कि C-DAC के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को HPC क्लस्टर एक्सेस तथा पैरेलल प्रोग्रामिंग का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।

उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को सुपरकंप्यूटिंग तकनीक की कार्यप्रणाली समझने के साथ-साथ इस क्षेत्र में उपलब्ध अध्ययन, शोध और करियर की संभावनाओं को जानने का अवसर मिला।

C-DAC विशेषज्ञों ने समझाई HPC की तकनीक

कार्यशाला में C-DAC पुणे के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। C-DAC के पूर्व वैज्ञानिक एवं वर्तमान वरिष्ठ सलाहकार इंजीनियर आशिष कुवेलकर ने हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मूल अवधारणाओं, इसकी उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों की विस्तृत जानकारी दी।

तकनीकी सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को HPC क्लस्टर एक्सेस, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा OpenMP के माध्यम से पैरेलल प्रोग्रामिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विद्यार्थियों ने तकनीकी सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सुपरकंप्यूटिंग से जुड़े विभिन्न विषयों को समझा तथा विशेषज्ञों से सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

उन्नत कंप्यूटिंग में करियर की संभावनाओं से हुए परिचित

आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, मौसम पूर्वानुमान, वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्य अत्याधुनिक क्षेत्रों में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए इस क्षेत्र की तकनीकी समझ भविष्य के अध्ययन और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला ने विद्यार्थियों को कक्षा की पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर वास्तविक सुपरकंप्यूटिंग वातावरण और पैरेलल कंप्यूटिंग की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यशाला के आयोजन में NSM नोडल केंद्र के समन्वयक डॉ. नारायण पी. भोसले, कंप्यूटर विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विकास कुमार सिंह, डॉ. सुदेश कुमार तथा डॉ. सुहेल ए. खान का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को उन्नत कंप्यूटिंग तकनीकों से जोड़ना और उन्हें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना था। कार्यशाला के सफल आयोजन से विद्यार्थियों को सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और रोजगार की नई संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिली।

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