कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर। अनूपपुर एवं शहडोल जिले के ग्रामीण अंचलों में पिछले चार माह से पांच हाथियों का आतंक लगातार जारी है। हाथियों के हमलों से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। एक आक्रामक हाथी अब तक छत्तीसगढ़ के मरवाही, अनूपपुर एवं शहडोल जिले में चार ग्रामीणों तथा आठ मवेशियों की जान ले चुका है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण रात-रात भर जागकर अपने परिवार और मवेशियों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं।
शुक्रवार को मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के प्रदेशाध्यक्ष रामलाल रौतेल ने हाथी प्रभावित खांड़ा गांव का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की तथा हाथी द्वारा किए गए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एवं संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही खतरनाक हाथी का रेस्क्यू कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
जानकारी के अनुसार तीन हाथियों का समूह जैतहरी क्षेत्र के धनगवां बीट के जंगलों में कई दिनों से डेरा जमाए हुए है, जबकि एक दंतैल हाथी छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पार करते हुए लगातार गांवों में घुसकर फसलों, मकानों और मवेशियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी हाथी ने अनूपपुर जिले के भोलूगढ़ और पिपरिया में एक महिला एवं युवती, मरवाही क्षेत्र में एक व्यक्ति तथा शहडोल जिले के गिरवा गांव में एक वृद्ध की जान ले ली।
खांड़ा गांव निवासी मोहन सिंह उर्फ ललऊ ने बताया कि हाथी उनके घर पर सात बार हमला कर चुका है, जिससे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हाथी ने गौशाला में बंधी बछिया को भी मार डाला तथा खेतों में बने मचान, झोपड़ियों और पेड़ों को नुकसान पहुंचाया। भय के कारण उनका परिवार पिछले एक माह से रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के स्थायी समाधान और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। वहीं वन विभाग लगातार हाथियों की निगरानी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। पूरे क्षेत्र में हाथियों के आतंक से दहशत का माहौल बना हुआ है।



































