महिला राष्ट्र निर्माण की प्रमुख शक्ति, पर सामाजिक चुनौतियों से मन व्यथित : डॉ. प्रभा राज

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मनेन्द्रगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ की रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभा राज ने समाज में महिलाओं की भूमिका और चुनौतियों को लेकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं समाज, परिवार और राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कई सामाजिक समस्याएं ऐसी हैं जो मन को व्यथित कर देती हैं।

 

डॉ. प्रभा राज ने कहा कि आने वाले समय में महिलाएं राष्ट्र निर्माण की प्रमुख शिल्पकार होंगी। आज की महिला कर्तव्यनिष्ठा, दया, ममता, मदद, मानवता और संस्कारों की प्रतीक है। यदि समाज में इन मूल्यों का व्यापक जागरण हो जाए तो एक विकसित समाज, सुदृढ़ परिवार और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि महिला मानवता का शंखनाद है, वीरता की वसुंधरा है और आकाश की तरह विशाल एवं बलवान है, इसलिए ऐसी सभी महिलाओं को नमन किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि महिला दिवस मनाने के बावजूद आज भी कई महिलाएं और बेटियां असुरक्षा, प्रताड़ना और अन्याय का सामना कर रही हैं। दहेज प्रथा को समाज की बड़ी बुराई बताते हुए उन्होंने कहा कि कई बार महिलाएं भी अनजाने में इस कुरीति को बढ़ावा देती हैं। यदि महिला और पुरुष दोनों मिलकर दहेज लेने और देने से इंकार कर दें तो किसी भी बेटी को दहेज के कारण प्रताड़ित नहीं होना पड़ेगा।

 

डॉ. राज ने कहा कि बेटा और बेटी को समान दर्जा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। एक मां की जिम्मेदारी है कि वह अपने बेटे को ऐसे संस्कार दे कि वह किसी भी महिला के साथ सम्मानजनक व्यवहार करे। साथ ही महिलाओं को भी एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और बिना कारण किसी अन्य महिला को परेशान या अपमानित नहीं करना चाहिए।

 

उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर और विवेकशील बनने का संदेश देते हुए कहा कि किसी की बातों में आकर निर्णय लेने के बजाय स्वयं की समझ से सही और गलत का आकलन करना जरूरी है। चाटुकारिता और चापलूसी जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहकर ही समाज को स्वस्थ और सकारात्मक बनाया जा सकता है।

 

डॉ. प्रभा राज ने कहा कि ईश्वर ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है, इसलिए समाज को भेदभाव से नहीं बल्कि इंसानियत से जोड़ने की जरूरत है। युवाओं और महिलाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि समाज में संस्कार, मानवता और एकता का वातावरण बने तो विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे महिलाएं शोध, नवाचार और वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं होगा, तब तक विश्व के कल्याण की कल्पना नहीं की जा सकती।

 

अंत में उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण के मार्ग पर दृढ़ निश्चय और मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है। समाज में ऐसी स्थिति बननी चाहिए कि गर्भ में पल रही किसी भी बेटी की हत्या न हो और कोई भी बेटी दहेज या अत्याचार का शिकार न बने। नारी शक्ति ही नवाचार, संवेदना और प्रगति की प्रेरणा है, जो राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है।

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