मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी  द्वारा धार में “सिलसिला” के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ आयोजित”  

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ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी

 

लगाकर शांति की एकता की सद्भाव की तस्वीर

 

चलो मिलकर के दुनिया का नया एल्बम बनाते हैं।

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यही संदेश था आज के आयोजन का

 

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, धार के द्वारा सिलसिला के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन 23 मार्च 2026 को होटल त्रिमूर्ति इन, धार में ज़िला समन्वयक अनीता मुकाती के सहयोग से किया गया।

धार में आयोजित सिलसिला के लिए मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा कि धार मध्यप्रदेश का एक ऐतिहासिक एवं साहित्यिक रूप से समृद्ध नगर है, जहाँ के शायरों और साहित्यकारों ने अपने सृजन के माध्यम से समाज को जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा ‘सिलसिला’ के अंतर्गत यहाँ प्रतिवर्ष वरिष्ठ एवं नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर साहित्यिक अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे परंपरा और आधुनिकता के बीच सार्थक संवाद स्थापित हो सके।

श्रीलंका से आई शोधार्थी सुभाषिणी रत्नायका की उपस्थिति उर्दू एवं भारतीय साहित्य की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। अकादमी ‘सिलसिला’ के माध्यम से प्रदेश भर में ऐसी ही साहित्यिक चेतना को निरंतर समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है।

धार ज़िले की समन्वयक अनीता मुकाती ने बताया कि सिलसिला के तहत शाम 6:00 बजे व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर मोहम्मद अकरम धारवी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में सुभाषिणी रत्नायका एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका सी एम ओ के. वी सिंह मंच पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर अकरम धारवी ने धार के उर्दू साहित्य के परिदृश्य के बारे में बात करते हुए कहा कि यहाँ के महत्वपूर्ण शायरों में हयात हाशमी, तबस्सुम धारवी, इज़हार शादानी, शांति सबा धार के ऐसे धारदार शायर हुए हैं जो कि हिंदुस्तान भर में अपनी उम्दा शायरी के लिए मशहूर रहे हैं और जिनकी बदौलत धार का नाम देश सहित विदेशों में भी पहुंचा।

श्रीलंका से प्रेमचंद पर पी एच डी करने आई सुभाषिणी रत्नायका ने कहा कि उन्हें प्रेमचंद की रचनाओं गोदान, कफ़न, ईदगाह आदि को पढ़कर और फ़िल्मी गीत छैया छैया सुनकर उर्दू से मोहब्बत हुई। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य में परिवर्तन देखा तो वह उसे देखने के लिए हिंदुस्तान तक आई हैं और उन्होंने हिंदुस्तान में आने के बाद हिंदुस्तान के हो जाने की बात भी कही कि जो यहां आता है वह यहीं का हो जाता है यहां के लोगों जैसा अतिथि सत्कार मैंने किसी देश में नहीं देखा।

रचना पाठ में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनमें असरार धारवी, नवीन माथुर पंचोली, नज़र धारवी, शाहिद सलाम साबरी, शब्बीर शादाब, राम परिंदा, शीरीन क़ुरैशी, दीपेंद्र पाठक, आशीष त्रिवेदी, नितेंद्र मंडावल, कैलाश चंद्र बंसल, प्रत्युष चौहान, गौरी पवार, महेश दांगी, संदीप यादव के नाम शामिल हैं।

पेश किए गए चंद अशआर:

 

शोलों का साथ दो न शरारों का साथ दो

मज़लूम हसरतों के सहारों का साथ दो

 

दरिया के दो किनारे हैं रेहमान और राम

गर हो सके तो दोनों किनारों का साथ दो

नज़र धारवी

 

बिखरते टूटते रिश्ते बहाल कर लोना।

कभी तो तर्क ये जाह ओ जलाल कर लोना

असरार धारवी

 

रात अब किस तरह बिताएँगे,

इन चिराग़ों में रौशनी कम है।

नवीन माथुर

 

बैठे-बैठे गिर जाते हैं आंसू क्यूँ तन्हाई में

जाने कितने दर्द छुपे हैं आंखों की गहराई में

शाहिद सलाम साबरी

 

है यही शर्त बंदगी के लिए

सर झुकाऊं तिरी ख़ुशी के लिए

डॉ शीरीन क़ुरैशी

 

मुस्कुराना जिंदगी है और हंसाना जिंदगी है

काम कर देना सहज में और बहाना जिंदगी है

राम परिंदा

 

गौरी पवार ने कहा ,

 

हज़ारों हसंती हुई आंखों को पूरनम बनाते हैं

 

बहुत ज़ालिम है ऐसे लोग लोग जो बम बनाते हैं

 

लगाकर शांति की एकता की सद्भाव की तस्वीर

 

चलो मिलकर के दुनिया का नया एल्बम बनाते हैं

 

कार्यक्रम का संचालन अनीता मुकाती द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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