लोकतंत्र मनुष्यता प्रतिरोध के आह्वान के साथ संपन्न हुआ इंदौर में प्रलेसं का 14वाँ राज्य सम्मेलन

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“उम्मीद से भर दें ये जहान” के ध्येय, स्वप्न, संकल्प और जुनून के साथ इंदौर में प्रगतिशील लेखक संघ, मध्य प्रदेश का दो दिवसीय 14वाँ राज्य सम्मेलन 24-25 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। ऐसे भारतीय और वैश्विक माहौल में जब सांस्कृतिक चरमपंथ, धार्मिक राष्ट्रवाद और पूँजीवाद अभिव्यक्ति की आज़ादी से लेकर मानवाधिकारों, नागरिकों के संवैधानिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार तक छीनता चला जा रहा है यह सम्मेलन लेखकों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, पत्रकारों, पाठकों श्रोताओं में नये सिरे से मानवीय गरिमा, सामूहिकता, चेतना की ताक़त और रोशनी भरनेवाला रहा।

प्रलेसं के राज्य सम्मेलन के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भाषाविद एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता गणेश एन देवी थे। उद्घाटन प्रलेसं के राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह सिरसा ने किया। अपने अविस्मरणीय वक्तव्य में गणेश एन देवी ने कहा- पिछले कुछ सालों में ज्ञात हत्यारों द्वारा जितने सोचने वालों की हत्या हुई है, एसआईआर प्रक्रिया द्वारा जितने नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया गया है उनकी संख्या यूरोप के कुछ देशों की कुल आबादी के बराबर है। हमें देखना पहचानना जानना होगा कि सोच का हत्यारा हिंसा का यह तूफ़ान कहाँ से आ रहा है? हड्डियों में ज्वर की तरह डर कहाँ से भरा जा रहा है? गणेश एन देवी ने गहरा संतोष जताया- इस सम्मेलन का ध्येय वाक्य हमारा भी संकल्प, साहस, आशा है, होने चाहिए- उम्मीद से भर दें ये जहान। बराबरी, न्याय, समानता की हमारी उम्मीद हमेशा रहेगी। क्योंकि हज़ारों साल में यह उम्मीद कभी नहीं मिटी।

राज्य सम्मेलन की पूर्व संध्या पर 23 अक्टूबर की शाम कबीर के पदों की सांगीतिक प्रस्तुति हुई। कलाकार थे विक्रम बोर्डिया और उनके साथी। ‘कबीर जन विकास समूह’ और ‘गुरुवाणी कबीर गायन मंडल’ के सहयोग से इस सांगीतिक प्रस्तुति को सबने ख़ूब सराहा। अगले दिन सम्मेलन की शुरुआत पंजाबी के जाने-माने साहित्यकार सुखदेव सिंह सिरसा द्वारा फीता काटकर पुस्तक एवं कविता पोस्टर प्रदर्शनी तथा कला दीर्घा के उद्घाटन से हुई। विभिन्न प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के स्टाल, मशहूर चित्रकार मुकेश बिजौले, पंकज दीक्षित के बनाए कविता पोस्टर तथा ग्वालियर से आये युवा चित्रकारों लक्ष्मी शर्मा, देवांश कदम, प्रेम प्रजापति, आरिफ़ के चित्रों की प्रदर्शनी ने सबको प्रभावित किया।

इस दो दिवसीय वैचारिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सांगठनिक आयोजन में व्यापकता, प्रतिबद्धता एवं समावेशिता देखने को मिलीं। पिछले कुछ वर्षों में दिवंगत विभूतियां हों जिनसे उम्मीद मिली या प्रगतिशीलता के पुरोधा पुरखे प्रेरणाश्रोत सबके चित्र देखने को मिले। प्रेमचंद से लेकर आनन्द मोहन माथुर, चन्द्रकान्त देवताले, कृष्णकांत निलोसे तक सभी के श्रद्धा स्मरण और चित्र बैनर ने स्मरण, अपनत्व और एकजुटता का एहसास कराया। “प्रतिरोध का अतीत और वर्तमान की चुनौतियाँ।” “हाशिये का समाज और साहित्य।” “भूमंडलीय समकाल में लेखकों का हस्तक्षेप।” तथा “लेखक संगठन, विचार और प्रतिबद्धता” जैसे विषयों पर मशहूर कवि लेखकों के व्याख्यान ने विचारोत्तेजक माहौल बनाया। सोचने को विवश किया। दृष्टि दी। प्रमुख वक्ता रहे-शैला शिंत्रे, सुबोध कुमार श्रीवास्तव, सुरेश शर्मा, नथमल शर्मा, कुमार अंबुज, हरिओम राजोरिया, दिनेश भट्ट, असअद अंसारी, आरती, विजेंद्र सोनी, शैलेंद्र शैली, हरनाम सिंह, मोहन कुमार डहेरिया, पवित्र सलालपुरिया, सुधीर सजल, सारिका श्रीवास्तव, सत्यम पाण्डेय और अभिषेक अंशु।

24 अक्टूबर की शाम दुनिया के लगभग चालीस देशों में प्रस्तुतियां दे चुकीं मशहूर कलाकार अनुप्रिया देवताले के वायलिन वादन ने हॉल में सहृदयों को मंत्रमुग्ध एवं नेत्र तरल कर दिया। जब कवि पुत्री अनुप्रिया का वायलिन वादन सम्पन्न हुआ तो समूचा सभागार भावपूर्ण निःशब्द सा दिखाई पड़ा। चन्द्रकान्त देवताले की स्मृति भी गूँज उठी।

पहले दिन की दोपहर देश प्रदेश और इंदौर शहर से जुटे लेखकों कलाकारों ने एक सद्भावना रैली निकाली। दूसरे दिन पहले वैचारिक सत्र के बाद सांगठनिक सत्र सम्पन्न हुआ। इसमें प्रलेसं मध्य प्रदेश की नयी कार्यकारिणी, सचिव मंडल एवं अध्यक्ष मंडल का गठन किया गया। वरिष्ठ कवि-लेखक मोहन कुमार डहेरिया नये प्रदेश अध्यक्ष एवं सुपरिचित कवि अनिल करमेले महासचिव चुने गए। अध्यक्ष महासचिव के नामों की घोषणा के उपरांत विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों द्वारा समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के ज्वलन्त मुद्दों पर गिरीश पटेल, दिनेश भट्ट, असअद अंसारी, शशिभूषण, सत्यम पाण्डेय, शैलेंद्र शैली, आरती, विनीत तिवारी द्वारा प्रस्ताव रखे गए जिन्हें पारित किया गया। पारित प्रस्तावों में डमी स्कूल बंद हों, नदी जोड़ो परियोजना रोकी जाए, नागरिकों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार न छीना जाए, पात्र मतदाताओं के नाम पुनः मतदाता सूची में जोड़े जाएं और एसआईआर बंद हो आदि प्रस्ताव प्रमुख थे।

राज्य सम्मेलन में प्रदेश की लगभग 23 इकाइयों के प्रतिनिधि, मध्य प्रदेश के बाहर से जितेंद्र भाटिया (मुंबई), रणेन्द्र (राँची), प्रेमचंद गांधी, ओमेंद्र (जयपुर), नथमल शर्मा (रायपुर), राकेश वानखेड़े (महाराष्ट्र) शेखर मल्लिक (झारखंड), शहादत(दिल्ली) आदि तथा साहित्य, संस्कृति, रंगमंच, संगीत, पत्रकारिता एवं कला जगत की डेढ़ सौ से अधिक जानी-मानी हस्तियाँ जुटीं। अनेक पुस्तकों, प्रगतिशील संवाद बुकलेट का विमोचन हुआ। 25 अक्टूबर की शाम सम्मेलन के अंत में एक बार देखने के बाद कभी न भूलने वाली अब्बास कियारोस्तामी की क्लासिक ईरानी फ़िल्म “मेरे दोस्त का घर कहाँ है” प्रदर्शित हुई। फ़िल्म प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने इस पर अपने विचार भी रखे।

राज्य सम्मेलन का आयोजन प्रलेसं इंदौर इकाई की ओर से प्रभारी राज्य महासचिव विनीत तिवारी की बहुआयामी देखरेख एवं सृजनात्मक नेतृत्व में हुआ। कहना ही होगा- देश में ही नहीं दुनिया भर में हो रहे जनपक्षधर प्रतिरोधों, आंदोलनों और सृजन के प्रति समर्थन, संलग्नता जताता जीता यह राज्य सम्मेलन अब सम्पन्न हो चुका है। लेकिन मुक्तिबोध के शब्दों में इस आयोजन की याद हमेशा रहेगी-“मुक्ति कभी अकेले में नहीं मिलती, यदि वह है तो सबके साथ है।” दोनों दिन के विभिन्न सत्रों का संचालन पवन करण, विनीत तिवारी, अनिल करमेले और शशिभूषण ने किया।

 

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