करियर के साथ आत्मसुरक्षा का पाठ: आईजीएनटीयू में छात्राओं को दिए गए ‘स्ट्रीट-स्मार्ट’ बनने के गुर
“एंपावर्ड ट्रांजिशन” सत्र में विशेषज्ञों ने बताया— पेशेवर सफलता के साथ व्यक्तिगत सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी
पर्यटन प्रबंधन विभाग की पहल, छात्राओं को कॉर्पोरेट दुनिया की चुनौतियों से कराया रूबरू
अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग (डीटीएम) द्वारा छात्राओं के सर्वांगीण विकास और आत्मसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। “एंपावर्ड ट्रांजिशन: मास्टरिंग प्रोफेशनल बाउंड्रीज एंड पर्सनल सेफ्टी” विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम छात्राओं को करियर की दुनिया में आत्मविश्वास और सजगता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
यह सत्र विशेष रूप से उन छात्राओं के लिए आयोजित किया गया था, जो आने वाले समय में इंटर्नशिप अथवा पूर्णकालिक रोजगार के लिए महानगरों और कॉर्पोरेट जगत में कदम रखने जा रही हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को केवल पेशेवर रूप से सक्षम बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा, आत्मसम्मान और व्यावहारिक समझ के प्रति भी जागरूक करना था।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री चैताली बक्षी रहीं, जो एक अनुभवी ग्राफिक डिजाइनर एवं इंडस्ट्री प्रोफेशनल हैं। उन्होंने प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों और डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों में छह वर्षों से अधिक कार्य करने के अपने अनुभवों को छात्राओं के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण से बाहर निकलकर कॉर्पोरेट दुनिया में प्रवेश करने के बाद किस प्रकार की चुनौतियों और परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है तथा उनसे कैसे सजगता और समझदारी के साथ निपटा जाए।
सुश्री बक्षी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र में व्यक्तित्व सबसे बड़ी पूंजी होता है, लेकिन इसके साथ अपनी गरिमा और सीमाओं को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक सफल प्रोफेशनल बनने के लिए आत्मविश्वास, स्पष्ट संवाद और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को “स्ट्रीट-स्मार्ट” बनने की सलाह देते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यवहारिक समझ और सतर्कता भी जरूरी है।
कार्यशाला के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। छात्राओं को कार्यस्थल पर अपनी पेशेवर सीमाएं तय करने, अनुचित व्यवहार की पहचान करने और आत्मसम्मान बनाए रखते हुए संवाद करने के तरीके बताए गए। इसके अलावा महानगरों में सुरक्षित आवास चुनने, पीजी एवं फ्लैट की जांच-परख, यात्रा के दौरान सावधानियां बरतने तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निजता बनाए रखने के उपायों पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी विशेष चर्चा हुई, जिसमें सोशल मीडिया पर प्रोफेशनल छवि बनाए रखने के साथ-साथ व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के महत्व को समझाया गया। छात्राओं को बताया गया कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता और जिम्मेदारी दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में विभाग की जूनियर छात्राओं को भी शामिल किया गया, ताकि विश्वविद्यालय स्तर पर ही जागरूकता और सम्मान की सकारात्मक संस्कृति विकसित की जा सके। आयोजकों का मानना है कि ऐसी पहल छात्राओं को भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुश्री चैताली बक्षी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उद्योग जगत के अनुभवों से विद्यार्थियों को परिचित कराना उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल कुशल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त नागरिक तैयार करना है, जो जीवन और कार्यक्षेत्र की हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।





































