कूड़ेदान में मिला सशस्त्र सेना झंडा दिवस का स्टीकर, जैतहरी तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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कूड़ेदान में मिला सशस्त्र सेना झंडा दिवस का स्टीकर, जैतहरी तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

सैनिकों के सम्मान से जुड़े प्रतीक को कूड़ेदान में फेंका गया, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग

जैतहरी। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों के पराक्रम, बलिदान और सेवा के सम्मान में मनाए जाने वाले सशस्त्र सेना झंडा दिवस से जुड़े स्टीकर का कूड़ेदान में पड़ा मिलना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

मामला जैतहरी तहसील कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां सशस्त्र सेना झंडा दिवस का स्टीकर कूड़ेदान में फेंका हुआ मिला। सेना के सम्मान और देश के वीर जवानों से जुड़े प्रतीक के इस तरह कूड़े में पड़े मिलने की तस्वीर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

सवाल यह है कि जिस सेना के जवान देश की सीमाओं पर अपना जीवन दांव पर लगाकर देश की रक्षा करते हैं, उनके सम्मान से जुड़े प्रतीक को कूड़ेदान में डालने की नौबत आखिर क्यों आई? क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को सशस्त्र सेना झंडा दिवस के महत्व की जानकारी नहीं थी?

सेना के सम्मान से जुड़े प्रतीक का यह हाल क्यों?

देश में सशस्त्र सेना झंडा दिवस सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान तथा उनके कल्याण के लिए योगदान की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में इससे संबंधित स्टीकर का कूड़ेदान में मिलना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती।

यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब प्रदेश में सरकार और प्रशासन लगातार सैनिकों के सम्मान तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को प्राथमिकता देने की बात करते हैं।

अब कलेक्टर की कार्रवाई पर निगाह

घटना सामने आने के बाद अब सबकी नजर अनूपपुर कलेक्टर रत्नाकर झा पर है। क्या कलेक्टर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जैतहरी तहसीलदार से जवाब मांगेंगे? क्या यह पता लगाया जाएगा कि सेना के सम्मान से जुड़ा स्टीकर कूड़ेदान तक कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

यदि प्रशासनिक स्तर पर यह लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी या फिर सेना के सम्मान से जुड़े इस मामले पर भी चुप्पी साध ली जाएगी—यह देखने वाली बात होगी।

कलेक्टर से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब

घटना के संबंध में अनूपपुर कलेक्टर रत्नाकर झा से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या सेना के सम्मान से जुड़े प्रतीक को कूड़ेदान में पहुंचाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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