कोलकाता की त्रिपक्षीय बैठक में गूंजे खान सुरक्षा के 25 बड़े मुद्दे, एचएमएस ने बढ़ती दुर्घटनाओं पर उठाए सवाल
36 श्रमिकों की मौत पर जवाबदेही तय करने, ठेका मजदूरों की सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और मूलभूत सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराने की उठी मांग

राजनगर/कोलकाता। कोल इंडिया लिमिटेड की त्रिपक्षीय सुरक्षा बैठक 30 जुलाई को कोलकाता में आयोजित हुई, जिसमें देशभर की कोयला खदानों में श्रमिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस), विभिन्न क्षेत्रों के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी, कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन, डायरेक्टर (टेक्निकल), कार्यकारी निदेशक (सेफ्टी), सभी सहायक कंपनियों एवं सीएमपीडीआईएल के सीएमडी सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) का प्रतिनिधित्व करते हुए अख्तर जावेद उस्मानी ने श्रमिक सुरक्षा से जुड़े 25 महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में देशभर की कोयला खदानों में 29 प्राणघातक दुर्घटनाओं में 36 श्रमिकों की जान गई, जबकि बीसीसीएल की मुनीडीह वाशरी में चार श्रमिकों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
उस्मानी ने सोहागपुर क्षेत्र में 6 नवंबर 2025 को हुई विद्युत दुर्घटना का मामला उठाते हुए कहा कि ठेकेदार द्वारा घटना को छिपाया गया, जबकि घायल श्रमिक की उंगली तक काटनी पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित को उचित मुआवजा देने की मांग की। कुसमुंडा परियोजना में संकरी हॉल रोड पर डंपर संचालन के कारण हुई दुर्घटना तथा बंगवार खान में एयर ब्लास्ट से हुई जानलेवा घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग रखी।
बैठक में कृष्णशिला खान में बिना नियुक्ति पत्र के ठेका श्रमिक से कार्य लेने, डब्ल्यूसीएल में लगातार हो रही घातक दुर्घटनाओं, बीसीसीएल में ठेका मजदूरों की बायोमैट्रिक उपस्थिति में अनियमितताओं तथा सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट को माइन सेफ्टी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
एचएमएस ने मांग की कि सभी खदानों में पर्याप्त सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। श्रमिकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण हेलमेट, गमबूट और अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) उपलब्ध कराए जाएं। बिना एसओपी और पीपीई के ठेका मजदूरों से कार्य लेने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही इलेक्ट्रिशियनों की कमी को सीधी भर्ती से पूरा करने, प्रत्येक खदान में मेन राइडिंग सिस्टम चालू रखने तथा भूमिगत खदानों में आधुनिक वायरलेस संचार व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई।
बैठक में यह भी कहा गया कि मेडिकल पोर्टल की प्रत्येक तिमाही समीक्षा हो, एसडीएल और एलएचडी ऑपरेटरों को एर्गोनॉमिक्स अध्ययन के अनुसार प्रत्येक घंटे कार्य के बाद 15 मिनट का विश्राम दिया जाए तथा शोर से होने वाली श्रवण क्षमता हानि (नॉइस इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस) के मामलों में श्रमिकों को उचित मुआवजा मिले। डीजीएमएस के पुराने तकनीकी परिपत्र में निर्धारित 85 डेसीबल शोर सीमा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संशोधित करने की भी मांग उठाई गई।
अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि सुरक्षा प्रबंधन योजना (सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान) की समीक्षा केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। इसे वास्तविक जोखिमों और संभावित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों के लिए तकनीकी रिफ्रेशर प्रशिक्षण अनिवार्य करने, मूल निर्माता अथवा अनुमोदित स्पेयर पार्ट्स के उपयोग, खदानों की फेंसिंग कर अवैध उत्खनन रोकने तथा मानसिक तनाव, एर्गोनॉमिक्स और खान सुरक्षा तकनीक पर अनुसंधान के लिए विशेष फंड उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई।
बैठक के अंत में कोल इंडिया प्रबंधन और डीजीएमएस अधिकारियों ने उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। साथ ही सुरक्षा सुधार संबंधी कार्यों की नियमित समीक्षा और प्रगति का परीक्षण करने का भरोसा भी दिया गया। एचएमएस ने उम्मीद जताई कि इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन से देश की कोयला खदानों में श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

















