अमरकंटक में संतान साते का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया

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अमरकंटक में संतान साते का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया

संतान की सुख-समृद्धि,दीर्घायु एवं स्वास्थ्य रक्षा की कामना से महिलाओं ने रखा व्रत,शिव-पार्वती की पूजा

संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाया जाने वाला संतान साते (संतान सप्तमी) व्रत श्रद्धा , भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ । क्षेत्र की महिलाओं ने अपनी संतानों के सुखमय जीवन , उत्तम स्वास्थ्य , दीर्घायु , उन्नति एवं संकटों से रक्षा की कामना करते हुए माताएं व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती है ।

धार्मिक मान्यता के अनुसार संतान सप्तमी व्रत संतान के कल्याण और परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है । इस अवसर पर महिलाओं ने भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन कर अपने बच्चों की मंगलकामना की । पूजन के दौरान महिलाओं ने सात गांठों वाला पवित्र संतान डोरा तैयार कर पूजा के उपरांत अपनी कलाई में बांधा, जिसे संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ।
कथा में माता पार्वती की कृपा , मातृत्व की शक्ति , तप , श्रद्धा और भक्ति के प्रभाव से संतान की रक्षा तथा उसके उज्ज्वल भविष्य का महत्व को बताया गया । धार्मिक विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख , शांति तथा समृद्धि बनी रहती है

पूजन के उपरांत महिलाओं ने भगवान को आटे और गुड़ से बने सात मीठे पूए , पंचमेवा एवं अन्य नैवेद्य अर्पित कर आरती उतारी तथा संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की । घरों और मंदिरों में दिनभर भक्ति , पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण बना रहा ।
पर्व के अवसर पर अमरकंटक क्षेत्र में विशेष धार्मिक उल्लास देखने को मिला

महिलाओं ने विश्वास व्यक्त किया कि संतान साते का यह पावन व्रत मातृत्व , त्याग , श्रद्धा और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है तथा इससे परिवार में सुख , शांति और खुशहाली का वास होता है

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