जेबीसीसीआई-12 का तत्काल गठन करे कोल इंडिया प्रबंधन, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन : अजय विश्वकर्मा
1 जुलाई को देशभर के कोयला क्षेत्रों में होगा ‘मांग दिवस सह आंदोलन’, श्रमिक हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं
बिश्रामपुर। कोयला उद्योग के लाखों श्रमिकों के वेतन समझौते के लिए गठित होने वाली जॉइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर कोल इंडस्ट्री (जेबीसीसीआई)-12 के गठन में लगातार हो रही देरी को लेकर संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) ने कोल इंडिया प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के महासचिव अजय विश्वकर्मा ने कहा कि प्रबंधन द्वारा जेबीसीसीआई-12 का गठन टालना कोयला मजदूरों के अधिकारों और सम्मान के साथ सीधा खिलवाड़ है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अजय विश्वकर्मा ने कहा कि जेबीसीसीआई-11 की अवधि समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नई वेतन वार्ता समिति का गठन नहीं किया गया है। इसके कारण देशभर के लाखों कोयला श्रमिक और उनके परिवार आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच श्रमिकों को उचित वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि कोयला मजदूर कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हुए देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे श्रमिकों के हितों की उपेक्षा न केवल उनके मनोबल को प्रभावित करती है, बल्कि कोयला उद्योग की कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
अजय विश्वकर्मा ने कोल इंडिया प्रबंधन और संबंधित मंत्रालय को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र जेबीसीसीआई-12 का गठन कर वेतन समझौते की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई, तो देशभर के कोयला मजदूर संगठन चरणबद्ध एवं व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है।
उन्होंने जानकारी दी कि इसी क्रम में 1 जुलाई 2026 को देश के सभी कोयला क्षेत्रों में “मांग दिवस सह आंदोलन” आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन के माध्यम से केंद्र सरकार, कोल इंडिया प्रबंधन एवं संबंधित मंत्रालय का ध्यान कोयला श्रमिकों की लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
अजय विश्वकर्मा ने सभी कोयला कर्मचारियों, पदाधिकारियों एवं श्रमिक हितैषियों से अपील की कि वे आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लें और इसे सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल नए वेतन समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि कोयला मजदूरों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक अधिकारों और न्यायपूर्ण भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्रमिकों की एकजुटता से उनकी मांगों को मजबूती मिलेगी और प्रबंधन को शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।



































