- सहायक सचिव रमेश विश्वकर्मा की भूमिका पर उठे सवाल, प्रधानमंत्री आवास से लेकर निर्माण कार्यों तक अनियमितताओं की शिकायत
जमुना कोतमा। जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत सकोला में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्माण कार्यों, खेत-तालाब निर्माण और अन्य जनहितकारी योजनाओं में गड़बड़ी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन मामलों में जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर अनूपपुर और जनपद पंचायत सीईओ के समक्ष कई बार शिकायतें की गईं। शिकायतों के बाद जांच होने और संबंधित लोगों को दोषी पाए जाने की बात भी कही जा रही है। इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत के सहायक सचिव रमेश विश्वकर्मा की भूमिका को लेकर शिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जा रही है हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्ट, वित्तीय अभिलेखों और विभागीय आदेशों के स्वतंत्र परीक्षण से होना आवश्यक है
प्रधानमंत्री आवास और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के आरोप
ग्राम पंचायत सकोला में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों तथा पंचायत के अंतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताएं हुईं और निर्माण कार्यों में शासकीय राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल हैं
इसी तरह खेत-तालाब निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में भी कथित गड़बड़ियों की शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। यदि इन कार्यों में स्वीकृत राशि, वास्तविक निर्माण, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख और मौके पर मौजूद स्थिति के बीच अंतर पाया गया है, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए
ग्रामीण विकास योजनाओं का उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना, जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराना और किसानों को जल संरक्षण जैसी सुविधाओं का लाभ देना है। ऐसे में यदि किसी योजना में वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसका सीधा असर पात्र हितग्राहियों और ग्रामीणों के हितों पर पड़ सकता है।
शिकायतों और जांच के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायतें की गईं और जांच भी हुई। उनका दावा है कि जांच में अनियमितताएं सामने आईं, लेकिन अब तक ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी, जिससे जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके
यदि जांच में वास्तव में दोष सिद्ध हुआ है, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रकरण में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। क्या जांच प्रतिवेदन पर विभागीय स्तर पर निर्णय लिया गया? क्या राशि की वसूली, विभागीय कार्रवाई या अन्य वैधानिक कदमों की प्रक्रिया शुरू हुई? यदि कार्रवाई लंबित है, तो उसका कारण क्या है?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेखों और अधिकारियों के पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा। केवल शिकायत दर्ज होने या जांच होने से दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन जांच के निष्कर्षों पर समयबद्ध निर्णय लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सचिव के प्रभार के दौरान भी गड़बड़ी के आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रमेश विश्वकर्मा जब पंचायत सचिव के प्रभार में थे, उस दौरान भी विभिन्न निर्माण कार्यों, खेत-तालाब निर्माण और जनहितकारी कार्यों में शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग तथा हेराफेरी की शिकायतें सामने आई थीं। अब वे सहायक सचिव के पद पर कार्यरत हैं
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि पंचायत के कामकाज में सहायक सचिव की भूमिका प्रभावशाली बनी हुई है और सरपंच की कार्यप्रणाली पर भी उनके प्रभाव को लेकर सवाल उठते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अवधि के भुगतान अभिलेख, कार्यादेश, तकनीकी मूल्यांकन, ऑडिट रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों के बयान महत्वपूर्ण होंगे
यदि पूर्व में हुई जांच में वित्तीय अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं, तो जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिम्मेदारी तय करना और नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। वहीं, यदि जांच अधूरी है या किसी स्तर पर कार्रवाई लंबित है, तो उसके कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए
ग्रामीणों के हितों से जुड़ा है मामला
ग्राम पंचायतों को विकास योजनाओं के संचालन के लिए सरकारी धन उपलब्ध कराया जाता है। इस राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। पंचायत स्तर पर कथित अनियमितताओं की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने से ग्रामीणों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है
सकोला पंचायत के मामले में भी यह जरूरी है कि शिकायतों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए। संबंधित कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, भुगतान और निर्माण संबंधी अभिलेखों की जांच की जाए तथा जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से जवाबदेही तय करने की मांग
ग्राम पंचायत सकोला में लगाए गए आरोपों के संबंध में अब जिला प्रशासन और जिला पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पूर्व में की गई शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन मामलों में क्या निष्कर्ष निकले और अब तक क्या कार्रवाई हुई
प्रशासन को प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्माण कार्यों, खेत-तालाब निर्माण तथा अन्य योजनाओं के अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो जांच के निष्कर्षों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राम पंचायत सकोला में कथित भ्रष्टाचार की शिकायतों पर जांच के बाद कार्रवाई की स्थिति क्या है? क्या संबंधित अधिकारियों ने जांच प्रतिवेदन पर कोई अंतिम निर्णय लिया है, और यदि नहीं, तो कार्रवाई में देरी का कारण क्या है? इन सवालों पर जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है






































































