एकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ पर्वराज पर्यूषण
अनंतमति माता जी के सान्निध्य में वर्षों बाद निकली भव्य संयुक्त शोभायात्रा
कोतमा। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिष्या एवं आचार्य गुरुवर 108 समयसागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से आर्यिका 105 अनंतमति माता जी ससंघ के पावन सान्निध्य में कोतमा नगर में आयोजित दस लक्षण पर्व (पर्वराज पर्यूषण) भक्ति, आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबियों ने आत्मशुद्धि के दस धर्मों—उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य—का विधि-विधान से पालन किया।
पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर आर्यिका अनंतमति माता जी के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर एवं श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर समितियों द्वारा संयुक्त रूप से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। कई वर्षों से दोनों समितियों की शोभायात्राएं अलग-अलग निकलती रही थीं, लेकिन इस बार पूज्य माता जी की प्रेरणा से आपसी मतभेद और दूरियों को समाप्त करते हुए दोनों मंदिर समितियों ने एक साथ शोभायात्रा निकालने का निर्णय लिया। यह पहल समाज में एकता और आपसी सौहार्द का अदभुत संदेश देने वाली रही।
संयुक्त शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी जिसमें बिजुरी, जैतहरी, बुढार, मनेंद्रगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु कोतमा पहुंचे। बच्चों, महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने नंगे पैर चलकर अपनी आस्था और भक्ति का परिचय दिया। भगवान के सुमधुर भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते-गाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए।
शोभायात्रा में श्रद्धालुओं द्वारा अपने-अपने घरों के द्वार पर आकर्षक रंगोलियां सजाई गईं। जगह-जगह श्रीजी की आरती उतारकर आशीर्वाद लिया गया।


































































