धनौरा पंचायत में भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं का आरोप, कार्रवाई नहीं होने पर शिवसेना ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा, पंचायत कार्यालय नियमित नहीं खुलने का आरोप
शहडोल। जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत धनौरा में कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही एवं पंचायत व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर शिवसेना ने 14 मई 2026 को जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपकर जांच एवं कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत धनौरा की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है और पंचायत का संचालन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। पंचायत कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुलता, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत में पदस्थ प्रभारी सचिव अधिकांश समय केशवाही ग्राम पंचायत में ही रहते हैं और धनौरा पंचायत के कार्यों के लिए भी लोगों को वहीं बुलाया जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि धनौरा से केशवाही की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है। ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र, आय, निवास, पेंशन, मनरेगा एवं अन्य पंचायत संबंधी छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को भीषण गर्मी में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसका सबसे अधिक असर महिलाओं, बुजुर्गों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत में न तो नियमित सचिव की व्यवस्था है और न ही रोजगार सहायक पदस्थ है। इसके चलते पंचायत के विकास कार्यों एवं शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। लोगों का कहना है कि पंचायत के कई महत्वपूर्ण कार्य बिना पारदर्शिता के संचालित किए जा रहे हैं।
विवाद का एक बड़ा कारण पंचायत क्षेत्र में चल रहा चेक डैम निर्माण कार्य भी बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य में मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी मशीनों का उपयोग कराया जा रहा है। जबकि ऐसे कार्यों का उद्देश्य स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना होता है। ग्रामीणों का कहना है कि मशीनों के उपयोग से न केवल मजदूरों का रोजगार प्रभावित हो रहा है, बल्कि शासन की मंशा और योजनाओं के नियमों की भी अनदेखी की जा रही है।
शिवसेना पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में विकास कार्यों की निगरानी एवं प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठ जाएगा।
शिवसेना ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आगामी दो दिनों के भीतर शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन शहडोल जिला मुख्यालय पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपेगा तथा व्यापक धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों के हितों एवं पंचायत में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि पंचायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर प्रशासन क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।






































