ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी
2025 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करोड़ों रुपए के विज्ञापन के साथ यह घोषणा की थी कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को चिन्हित निजी अस्पतालों में कैशलेस सुविधा प्रदान की जाएगी जिसके अंतर्गत गोल्डन ओवर यानी की प्रथम 1 घंटे में प्राथमिक उपचार के तौर पर ₹4000 की त्वरित सहायता की जाएगी यदि दुर्घटना गंभीर है तो 7 दिन तक अस्पताल का खर्च सरकार की पीएम राहत योजना के अंतर्गत किया जाएगा जिसमें सरकार द्वारा डेढ़ लाख रुपए की राशि अस्पतालों को प्रदान की जाएगी लेकिन यह तभी संभव हो सकता है जब अस्पताल पुलिस और प्रशासन का क्रियान्वय समुचित ढंग से हो तभी इसका लाभ पीड़ित को मिल सकता है धार जिले में हालात यह है ईडार [e deer ] पोर्टल पर पुलिस विभाग द्वारा स्वीकृत ही प्रदान नहीं की जाती है जिसके परिणाम स्वरूप कैसे निरस्त हो जाता है पीड़ित को इसका लाभ नहीं मिल पाता है धार जिले के लगभग सभी अस्पताल संचालकों ने दबी जबान में इस बात को स्वीकार किया है कि गिटार पोर्टल की निष्क्रियता के परिणाम स्वरूप दुर्घटना में पीड़ित को लाभ हम नहीं दे सकते कई अस्पताल संचालकों ने तो कैमरे के सामने बोलने से ही मना कर दिया कुछ का तथ्य यह था कि हम आयुष्मान के अंतर्गत इन लोगों का इलाज कर रहे हैं पर आयुष्मान की शर्तें और दुर्घटना में घायल व्यक्ति की शर्तें कहीं से कहीं तक मैच नहीं हो सकती है उनका यह झूठ साफ नजर आता है क्या जिला प्रशासन प्रधानमंत्री की इतनी महत्वपूर्ण योजना को क्रियान्वित करने का प्रयास करेगा अभी तक इस योजना में मात्र 136 रहवीर पुरस्कृत हो सके हैं जबकि यदि दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो इस योजना के बाद में 70000 से अधिक दुर्घटनाएं हुई है कई दुर्घटनाओं में तो मेरी की अस्पताल से छुट्टी होने तक पुलिस बयान नहीं हो पा रहे














