बप्पा के स्वागत में सजा कोतमा, घर-घर गूंजे जयकारे

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बप्पा के स्वागत में सजा कोतमा, घर-घर गूंजे जयकारे

10 दिवसीय गणेशोत्सव शुरू, मिट्टी की प्रतिमाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे श्रद्धालु

रिपोर्टर भरत मिश्रा, कोतमा

कोतमा। सोमवार से कोतमा नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में 10 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ हो गया। प्रथम पूज्य भगवान गणेश के स्वागत को लेकर नगर में उत्सव और भक्ति का माहौल दिखाई दे रहा है। जगह-जगह गणेश उत्सव समितियों द्वारा आकर्षक पंडाल सजाकर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। वहीं घरों में भी श्रद्धालु विशेष तैयारियों के साथ बप्पा को विराजमान कर रहे हैं।

गणेश चतुर्थी को लेकर बच्चों, महिलाओं और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार छोटी-बड़ी मिट्टी की प्रतिमाएं खरीदकर घर ले जाते दिखाई दिए। कई घरों में भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष झांकियां और सजावट की गई है।

चार साल से घर में बप्पा को विराजमान कर रहीं सारिका

कोतमा नगर की बच्ची सारिका गुप्ता पिछले चार वर्षों से अपने घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर रही हैं। इस वर्ष भी उन्होंने घर में आकर्षक झांकी सजाई है। वह अपने दोनों भाइयों के साथ बाजार पहुंचीं और मिट्टी की गणेश प्रतिमा लेकर घर पहुंचीं।

सारिका का कहना है कि घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से मन को अलग तरह की शांति और संतुष्टि मिलती है। 10 दिनों तक घर में उत्सव जैसा माहौल रहता है। उनका विश्वास है कि भगवान गणेश का आशीर्वाद पढ़ाई-लिखाई में भी मिलता है। दस दिन पूजा-अर्चना के बाद नगर पालिका द्वारा बनाए गए कुंड में प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

20 किलोमीटर दूर से बप्पा की प्रतिमा लेने पहुंचीं शियांशी

ग्रामीण क्षेत्र जमुनिहा निवासी शियांशी पिछले तीन वर्षों से अपने घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले मोहल्ले में पंडाल सजाकर गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती थी, लेकिन अब घर में बप्पा को विराजमान करने की परंपरा शुरू की है। उनके अनुसार भगवान गणेश के आगमन से घर में खुशियां बनी रहती हैं और दस दिनों तक परिवार में भक्तिमय वातावरण रहता है।

इस वर्ष भी उन्होंने घर में प्रतिमा स्थापना के लिए विशेष सजावट की है। घर के मुख्य द्वार पर चौक बनाया गया है और ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान गणेश का स्वागत करने की तैयारी की गई है। शियांशी अपनी बहनों के साथ करीब 20 किलोमीटर दूर से कोतमा बाजार में गणेश प्रतिमा लेने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करती हैं, ताकि विसर्जन के बाद प्रतिमा पानी में आसानी से घुल जाए और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

परिवार के साथ तीन साल से कर रहे गणेश पूजा

ग्रामीण क्षेत्र बेलियाबड़ी निवासी धीरज पाण्डेय अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ कोतमा बाजार में भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदने पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से वह घर में मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। दस दिनों तक परिवार के सभी सदस्य मिलकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

धीरज पाण्डेय के अनुसार भगवान गणेश उनके प्रथम पूज्य आराध्य देव हैं। उनकी पूजा से मन में सकारात्मकता और श्रद्धा का भाव बना रहता है। घर में प्रतिमा स्थापना के लिए विशेष सजावट की गई है। दस दिनों तक सुबह से देर रात तक घर में भक्तिमय वातावरण रहता है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा में सहभागिता करते हैं।

भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए परिवार की महिलाएं घर में ही लड्डू और मोदक तैयार करती हैं। धीरज ने बताया कि परिवार द्वारा मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि विसर्जन के दौरान मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

महाराष्ट्र की संस्कृति में साड़ी पहनकर अवनी ने किया बप्पा का स्वागत

कोतमा नगर की अवनी पाण्डेय भगवान गणेश के घर आगमन को लेकर बेहद उत्साहित नजर आईं। उन्होंने अपने हाथों से घर में आकर्षक झांकी सजाई है। महाराष्ट्र की संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए साड़ी पहनकर वह बाजार पहुंचीं और मिट्टी की गणेश प्रतिमा खरीदकर बाजे-गाजे के साथ घर लेकर गईं।

अवनी ने बताया कि बप्पा के घर आगमन से दस दिनों तक परिवार में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहता है। परिवार के सभी सदस्य दोनों समय विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। उन्होंने भी मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता दी है, ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

मिट्टी की प्रतिमाओं को मिल रही प्राथमिकता

गणेशोत्सव के दौरान इस बार श्रद्धालुओं में मिट्टी की प्रतिमाओं को लेकर विशेष जागरूकता दिखाई दे रही है। बच्चों और युवाओं सहित परिवारों द्वारा मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि गणेशोत्सव आस्था और भक्ति का पर्व होने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी अवसर है।

नगर में विभिन्न स्थानों पर पंडाल सजाने का कार्य जारी है। आने वाले दिनों में पंडालों में धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होने की संभावना है। दस दिनों तक कोतमा नगर में गणपति बप्पा की भक्ति और जयकारों से वातावरण भक्तिमय रहने वाला है।

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