बढ़ौरा शिव मंदिर वायरल वीडियो पर सियासत गरम, श्रद्धालुओं की जान बचाने वाले पुलिसकर्मी पर उठ रहे सवाल

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बढ़ौरा शिव मंदिर वायरल वीडियो पर सियासत गरम, श्रद्धालुओं की जान बचाने वाले पुलिसकर्मी पर उठ रहे सवाल

कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर अमित पांडेय, सीधी

सीधी। बढ़ौरा नाथ शिव मंदिर में अधिकमास के अंतिम सोमवार को उमड़ी भारी भीड़ के बीच वायरल हुए एक वीडियो ने जिले में नई बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग पुलिसकर्मी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक इसे एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा संकट की घड़ी में निभाए गए कर्तव्य के रूप में देख रहे हैं।

जानकारी के अनुसार अधिकमास के अंतिम सोमवार को बढ़ौरा नाथ शिव मंदिर में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर का गर्भगृह एवं निकासी मार्ग काफी संकीर्ण होने के कारण भीड़ का दबाव लगातार बढ़ रहा था। इसी दौरान कुछ श्रद्धालुओं के एक-दूसरे पर गिरने और भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका पैदा हो गई।

वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पहले सामान्य रूप से भीड़ प्रबंधन का कार्य कर रहा है। लेकिन जैसे ही हालात बिगड़ने की संभावना बनी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में नजर आई, उसने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू कर दिया। वीडियो में पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करते हुए श्रद्धालुओं को तेजी से निकासी मार्ग की ओर बढ़ाता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। ऐसे में पुलिसकर्मी की तत्परता और सूझबूझ ने संभावित हादसे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि वीडियो का एक छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने पुलिसकर्मी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर अनेक नागरिकों का मानना है कि किसी भी घटना का मूल्यांकन उसके पूरे संदर्भ में किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब हजारों लोगों की सुरक्षा दांव पर हो, तब पुलिसकर्मियों को त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने पड़ते हैं।

फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की जान बचाने और संभावित भगदड़ को रोकने का प्रयास करने वाले पुलिसकर्मी पर बिना पूरे तथ्य जाने सवाल उठाना उचित है? यह प्रश्न अब आमजन और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।यह प्रारूप समाचार-पत्र में प्रकाशित करने योग्य है तथा आकर्षक शीर्षक और रिपोर्टर क्रेडिट के साथ तैयार किया गया है।

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