अमरकंटक में श्रावण पंचमी में उमड़ा आस्था का सैलाब
तड़के 3 बजे से शुरू हुआ स्नान-दर्शन का क्रम, ज्वालेश्वर महादेव के जलाभिषेक को लगीं लंबी कतारें
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास के तृतीय सोमवार श्रावण शुक्ल पंचमी एवं नाग पंचमी के पावन संयोग पर मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पर्यटक , धार्मिक , आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला ।
मां नर्मदा की पवित्र स्थली में मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ , ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान , मां नर्मदा के दर्शन-पूजन तथा भगवान ज्वालेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ प्राप्त किया ।
सोमवार तड़के लगभग 3 बजे से ही नर्मदा उद्गम क्षेत्र , रामघाट , कोटितीर्थ घाट एवं ज्वालेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी । भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़िए नर्मदा जल लेकर “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष के साथ ज्वालेश्वर धाम की ओर बढ़ते रहे ।
नर्मदा स्नान के बाद
श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन-पूजन कर पवित्र जल लेकर और उसी जल से भगवान ज्वालेश्वर महादेव का अभिषेक किया जा रहा है । ज्वालेश्वर धाम में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं तथा पूरा वातावरण शिवभक्ति से सराबोर रहा ।
मां नर्मदा उद्गम मंदिर प्रांगण , कोटितीर्थ घाट और रामघाट सहित अनेक स्थलों पर दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा । धार्मिक मंत्रोच्चार , भजन-कीर्तन और शिवनाम संकीर्तन से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया ।
नाग पंचमी के विशेष महत्व के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली ।
बिलासपुर , मुंगेली , रायपुर , कोरबा , रतनपुर , शहडोल , अनूपपुर , डिंडोरी , पुष्पराजगढ़ सहित अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे । कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के माध्यम से तो कई निजी वाहनों से यहां पहुंचे ।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मां नर्मदा मंदिर , रामघाट , कोटितीर्थ घाट , ज्वालेश्वर तिराहा एवं ज्वालेश्वर धाम सहित प्रमुख स्थलों पर पुलिस एवं सुरक्षा कर्मी मुस्तैद रहे । यातायात व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए ।
श्रावण मास सोमवार के इस पावन अवसर पर और नागपंचमी के शुभ दिन पर अमरकंटक पूरी तरह शिवमय नजर आया । नर्मदा तट से लेकर ज्वालेश्वर धाम तक आस्था की अविरल धारा बहती रही और पूरे दिन “नर्मदे हर” तथा “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे ।




































