- सीएससी केंद्र, किराना और कृषि गतिविधियों से परिवार की आय को मिला सहारा
अनूपपुर 04 अक्टूबर 2026/ पुष्पराजगढ़ विकासखंड के ग्राम सरई निवासी श्रीमती अनीता सिंह ने आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है। बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त अनीता सिंह आज गांव में सीएससी केंद्र का संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही परिवार द्वारा किराना व्यवसाय और कृषि कार्य भी किया जा रहा है। इन गतिविधियों से परिवार को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। समूह से मिले सहयोग, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा ने अनीता को अपनी क्षमता के अनुसार काम शुरू करने का अवसर दिया।
अनीता बताती हैं कि विवाह से पहले वे अपनी माता सुधा बाई के साथ ग्राम डबनिया में रहती थीं। उनकी माता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। घर में समूह की गतिविधियों को देखते हुए अनीता को भी इस कार्य में रुचि हुई। 12वीं के बाद उन्होंने आजीविका मिशन से जुड़कर सीआरपी के रूप में कार्य किया। वर्ष 2021 में उनका विवाह ग्राम सरई निवासी श्री सुनील सिंह के साथ हुआ। विवाह के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के उद्देश्य से उन्होंने अप्रैल 2021 में नर्मदा स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली।
समूह से जुड़ने के बाद अनीता को बीसी सखी का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण में मिली जानकारी से उन्हें डिजिटल सेवाओं और बैंकिंग से संबंधित कार्यों को समझने में मदद मिली। इसके बाद उन्होंने गांव में ही सीएससी केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए समूह से 40 हजार रुपये का सीआईएफ ऋण लेकर कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और बायोमेट्रिक उपकरण खरीदे। बाद में केंद्र के विस्तार के लिए सीसीएल के माध्यम से 95 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया। भारतीय स्टेट बैंक की करपा शाखा से संबद्ध होकर वे गांव में लोगों को विभिन्न डिजिटल और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने लगीं।
सीएससी केंद्र के साथ अनीता ने परिवार की आय बढ़ाने के लिए किराना एवं जनरल स्टोर भी शुरू कराया। इसके लिए सीसीएल के माध्यम से 35 हजार रुपये का ऋण लिया गया। दुकान और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बाद में 75 हजार रुपये का आंतरिक ऋण भी प्राप्त किया। इस तरह समूह से मिली ऋण सुविधा का उपयोग उन्होंने अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को शुरू करने और विस्तार देने में किया।
आज अनीता का सीएससी केंद्र गांव के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। ग्रामीणों को डिजिटल बैंकिंग सहित विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ता। अनीता स्वयं केंद्र का संचालन करती हैं और इसके साथ परिवार की अन्य आजीविका गतिविधियों में भी सहयोग करती हैं। अलग-अलग गतिविधियों से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में बेहतर किया है।
अनीता सिंह बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद मुझे काम सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। समूह से ऋण लेकर मैंने सीएससी केंद्र शुरू किया, जिससे मेरी आय बढ़ाने में मदद मिली। मैं प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त करती हूं कि महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए इस तरह की योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
अनीता की कहानी बताती है कि प्रशिक्षण, समूह से जुड़ाव और समय पर मिली ऋण सुविधा का उपयोग अपनी जरूरत के अनुसार किया जाए, तो ग्रामीण परिवार अपनी आय के साधन बढ़ा सकते हैं। आज अनीता स्वयं अपना काम संभालने के साथ गांव के अन्य लोगों को भी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।



































































