- न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ कार्यक्रम
- बाल अधिकारों, संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता पर दिया गया विशेष जोर
अनूपपुर 01 नवंबर 2026/राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली की योजना ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का मध्यप्रदेश राज्य में राज्य स्तरीय शुभारंभ आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, जिला अनूपपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रशासनिक न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया के करकमलों से किया गया।
कार्यक्रम में न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर न्यायमूर्ति श्री दीपक खोत एवं माननीय न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर श्रीमती माया विश्वलाल तथा रजिस्ट्रार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक श्री एन.एस. हरिनारायण मूर्ति की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं नालसा थीम गीत का गायन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा साइबर अपराध एवं पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसके माध्यम से उपस्थित विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव एवं बच्चों के विधिक अधिकारों के संबंध में जागरूक किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चे स्वतंत्र रूप से शिक्षा ग्रहण कर सकें, खेल सकें तथा अपने सपनों एवं लक्ष्यों को साकार कर सकें, इसके लिए उनके अधिकारों एवं सुरक्षा का संरक्षण आवश्यक है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रारंभ किए गए ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा संबंधी प्रावधानों तथा आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता एवं संरक्षण की प्रक्रिया से अवगत कराना है। उन्होंने अभियान के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने हेतु व्यापक जनजागरूकता एवं सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता प्रतिपादित की।

न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर न्यायमूर्ति श्री दीपक खोत ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान परिदृश्य में बाल सुरक्षा का दायरा घर एवं विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल एवं इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल माध्यमों पर भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है। बच्चों को साइबर अपराधों, ऑनलाइन शोषण एवं अन्य डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूक किया जाना समय की आवश्यकता है।

इसी क्रम में सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सुमन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का सुरक्षित एवं संरक्षित बचपन ही देश के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। उन्होंने बाल अधिकारों के संरक्षण तथा बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका एवं दायित्वों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में आमंत्रित रिसोर्स पर्सन्स इस्कॉन मंदिर उज्जैन के श्री प्रेमावतार दास, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्री अनिरुद्ध जैन, श्रीमती संगीता श्रीवास्तव एवं श्री रावेन्द्र शर्मा द्वारा विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने, ध्यान एवं एकाग्रता के माध्यम से अध्ययन करने, नशे से दूर रहने तथा जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासित एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

उक्त कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर श्री अरविन्द श्रीवास्तव सहित जिला मुख्यालय अनूपपुर एवं तहसील सिविल न्यायालय कोतमा तथा राजेन्द्रग्राम के समस्त न्यायाधीशगण, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अनूपपुर श्री मनीष कुमार पाटीदार, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री प्रदीप ठाकुर, श्री बृजेश पटेल, श्री जितेन्द्र मोहन धुर्वे, अतिरिक्त रजिस्ट्रार श्री संजीव सिंह एवं सहायक रजिस्ट्रार श्रीमती पूजा उपस्थित रहीं।

इसके अतिरिक्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भेजरी एवं पोंड़की के शिक्षकगण एवं विद्यार्थीगण तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला एवं तहसील न्यायालयों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अनूपपुर के अधिकारी एवं कर्मचारीगण की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के माध्यम से बाल अधिकारों के संरक्षण, बाल सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम तथा बच्चों को उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूकता प्रसारित की गई। अभियान के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु सुरक्षित, संरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने तथा बाल संरक्षण के प्रति समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता बढ़ाने का संदेश दिया गया।







































































