शहडोल
- 5 लाख की वसूली, सोने की चेन, मोबाइल जब्त… और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल।
- अगर आपने सोशल मीडिया पर किसी महिला मित्र से दोस्ती की है तो सावधान हो जाइए।
कहीं ऐसा न हो कि एक दिन कुछ लोग अचानक आपके घर पहुंच जाएं, आपको पत्नी और बच्चों समेत जबरन उठा लें, थाने ले जाएं और फिर इज्जत, परिवार और जेल का डर दिखाकर लाखों रुपये की मांग शुरू कर दें।
अनूपपुर जिले से सामने आई एक शिकायत ने ऐसे ही कई सनसनीखेज सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता [मनोज कुमार निगम ने आरोप लगाया है कि रश्मी निगम, अब्दुल कलीम, शेख रशीद, और लालबहादुर जायसवाल सहित कुछ लोगों ने मिलकर कथित रूप से उन्हें गंभीर मामले में फंसाने का भय दिखाया और करीब 5 लाख रुपये, एक मोबाइल फोन तथा सोने की चेन ले ली।
- सबसे बड़ा सवाल: क्या पुलिस द्वारा दिन दहाड़े को परिवार सहित उठाया जा सकता है?
शिकायत में दावा किया गया है कि लोगों का एक समूह पुलिस सहित घर पहुंचा और शिकायतकर्ता को उसकी पत्नी एवं बच्चों के साथ थाने ले जाया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
– क्या किसी व्यक्ति को संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना घर से उठाया जा सकता है?
– क्या स्थानीय थाना क्षेत्र को सूचना दिए बगैर ऐसी कार्रवाई संभव है?
– क्या पत्नी और बच्चों को भी साथ ले जाना कानून सम्मत है?
– यदि कोई मामला था तो उसकी लिखित रिपोर्ट और वैधानिक दस्तावेज कहां हैं?
यही सवाल अब पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रहे हैं।
थाना या सौदेबाजी का अड्डा?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद कानूनी कार्रवाई के बजाय पैसों को लेकर बातचीत शुरू हुई।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दूसरा बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि:
क्या किसी पुलिस थाने में रकम की डील, समझौता या मध्यस्थता कराई जा सकती है?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, धन उगाही या निजी समझौते करवाना नहीं।
30 लाख की धमकी, 5 लाख की वसूली?
शिकायत के अनुसार पहले भारी रकम की मांग की गई। बाद में भय और दबाव के चलते कथित रूप से विभिन्न खातों में करीब 5 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। शिकायत में कई यूपीआई और बैंक ट्रांजैक्शन का भी उल्लेख किया गया है।
इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि:
– मोबाइल फोन भी ले लिया गया।
– लगभग 9.5 ग्राम सोने की चेन भी चली गई।
– बाद में समझौते का आवेदन भी लिखवा लिया गया।
50 हजार रुपये और किस अधिकार से?
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित वसूली के बाद भी पुलिस द्वारा अतिरिक्त 5 लाख रुपये की मांग की गई।
यहां सवाल उठता है कि:
यदि मामला कानूनी था, तो अतिरिक्त रकम किस अधिकार से मांगी गई?
यदि समझौता हो चुका था, तो नई मांग क्यों उठी?
और यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो क्या कुछ लोग कानून के नाम पर वसूली का समानांतर सिस्टम चला रहे थे?
- क्या सक्रिय है “हनी ट्रैप से ब्लैकमेल” का नेटवर्क?
मामले में सोशल मीडिया कनेक्शन की चर्चा भी सामने आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित महिला मित्रता को आधार बनाकर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया।
यही वजह है कि अब स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कहीं यह कोई संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क तो नहीं, जहां पहले दोस्ती, फिर आरोप और उसके बाद समझौते के नाम पर आर्थिक दबाव बनाया जाता हो।
हालांकि इसकी पुष्टि केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
- पुलिस की भूमिका पर उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल पुलिस की कथित भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि:
– थाने में कौन-कौन मौजूद था?
– क्या जीडी में एंट्री हुई थी?
– क्या कोई लिखित शिकायत दर्ज थी?
– किन परिस्थितियों में रकम का लेन-देन हुआ?
– समझौता पत्र कैसे बना?
– कथित तौर पर शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी?
अब निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा शिकायत करता
शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित रूप से ली गई रकम और सामान की बरामदगी तथा परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
अब देखना होगा कि यह मामला केवल दो पक्षों का विवाद साबित होता है या फिर जांच में कोई बड़ा ब्लैकमेलिंग नेटवर्क और कथित मिलीभगत का सच सामने आता है।
नोट:
- यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है।
- आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि एवं आधिकारिक जांच अभी होना शेष है।
- इस मामले से जुड़ी हम सभी खबरों से आपको अपडेट करते रहेंगे आप देखते रहिए







































































