अनूपपुर: हरद रेलवे अंडरब्रिज बना ‘मौत का जाल’, बिलासपुर रेल मंडल की लापरवाही से बड़ा हादसा तय!
अनूपपुर ब्यूरो चीफ रिपोर्ट दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाला अनूपपुर जिले का हरद रेलवे स्टेशन इन दिनों क्षेत्र की जनता के लिए घोर प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है। रेलवे स्टेशन के समीप लाखों रुपये की लागत से निर्मित अंडरब्रिज अब सुगम आवागमन देने के बजाय ‘मौत का जाल’ बन चुका है। इस अंडरब्रिज में पिछले कई महीनों से लगातार दो से तीन फीट तक गंदा पानी जमा है, जिसने पूरी सड़क को जलमग्न कर दिया है। पानी के नीचे छिपे जर्जर सड़क के गहरे गड्ढे और नुकीले पत्थर किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। इस जानलेवा रास्ते से रोजाना गुजरने वाले मासूम स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और दुपहिया वाहन चालकों की जिंदगी हर वक्त दांव पर लगी रहती है।इस गंभीर जलभराव और बदहाली के कारण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है
जिससे आधा दर्जन गांवों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थिति यह है कि मुख्य रास्ता बंद होने के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मजबूरन करीब पांच किलोमीटर का अतिरिक्त और पथरीला चक्कर लगाना पड़ रहा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बिलासपुर रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार लिखित शिकायतें करने और बार-बार विरोध जताने के बावजूद, रेल प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। विभागीय अफसरों की इस आपराधिक उदासीनता के कारण महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है
ग्रामीणों ने एक और गंभीर तकनीकी खामी उजागर करते हुए आरोप लगाया है कि अंडरब्रिज में जमा पानी सिर्फ बारिश का नहीं है, बल्कि रेलवे ट्रैक के नीचे से लगातार पानी का रिसाव (सीपेज) हो रहा है। अगर समय रहते रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा इसकी जांच नहीं की गई, तो यह सीपेज ऊपर से गुजरने वाले मुख्य रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। जनआक्रोश को देखते हुए अब पीड़ित जनता ने सीधे देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और डीआरएम बिलासपुर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि इस संवेदनशील अंडरब्रिज का तुरंत उच्च स्तरीय निरीक्षण कराया जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था हो और ट्रैक के नीचे हो रहे सीपेज की तकनीकी जांच कराई जाए, वरना ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। क्या रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? आम नागरिकों को सुरक्षित रास्ता देना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे वह पूरी तरह भाग रहा है







































































