रेलवे की प्राथमिकता पर सवाल: एक्सप्रेस को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ देने के फेर में लोकल यात्रियों की सुरक्षा दांव पर; बिजुरी में आधा घंटा फंसी रही पैसेंजर, कोतमा में चंद सेकंड में ही भागी
अनूपपुर ब्यूरो चीफ रिपोर्ट दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत अनूपपुर से चिरमिरी के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन (51756) का परिचालन अब आम यात्रियों के लिए राहत के बजाय आफत बनता जा रहा है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को इस रूट पर रेलवे के परिचालन विभाग की एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी सामने आई है। रेल प्रबंधन द्वारा एक्सप्रेस ट्रेनों को समय पर निकालने के दबाव में, इस पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों के समय और उनकी सुरक्षा, दोनों को ताक पर रख दिया गया
बिजुरी में बंधक बना समय, यात्री बेहालआधिकारिक समय सारणी के अनुसार, ट्रेन संख्या 51756 का बिजुरी स्टेशन (BJRI) पर कुल 10 मिनट का ठहराव निर्धारित है। लेकिन गुरुवार दोपहर को यह ट्रेन अपने तय समय से देरी से पहुंची और इसके बाद इसे आगे किसी वीआईपी/एक्सप्रेस ट्रेन को रास्ता देने (क्रॉसिंग क्लियर करने) के नाम पर लगभग आधे घंटे (30 मिनट) तक प्लेटफॉर्म पर ही रोक कर खड़ा रखा गया। उमस और गर्मी के बीच यात्री बोगियों में फंसे रहे, जिससे दैनिक यात्रियों, व्यापारियों और मरीजों को भारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।इस लापरवाही का दूसरा और सबसे खतरनाक पहलू कोतमा स्टेशन (KTMA) पर देखने को मिला। रेलवे नियमावली के मुताबिक यहाँ ट्रेन का 2 मिनट का वैध ठहराव है। लेकिन बिजुरी में हुई देरी की भरपाई करने और अपनी फाइल में ट्रेन की ‘रनिंग स्पीड’ को सुधारने के चक्कर में, प्रशासन ने कोतमा के यात्रियों के साथ क्रूर मजाक किया। ट्रेन को यहाँ तय 2 मिनट तो दूर, 1 मिनट भी पूरा नहीं रोका गया और महज कुछ सेकंड के भीतर ही इंजन ने सीटी बजाकर रफ्तार पकड़ ली
कोतमा प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के अचानक चलने से वहां अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कई बुजुर्ग और महिलाएं चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगे, जिससे वे गिरते-गिरते बचे। सवाल यह उठता है कि यदि जल्दबाजी में कोई यात्री ट्रेन के नीचे आ जाता, तो इस गंभीर हादसे की जिम्मेदारी बिलासपुर रेल मंडल का कौन सा अधिकारी लेता? क्या रेलवे के लिए आम यात्रियों की जान की कीमत सिर्फ एक कागजी देरी को छुपाने से कम है चिरमिरी-अनूपपुर रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें इस आदिवासी बाहुल्य और कोयलांचल क्षेत्र की जीवनरेखा हैं। इसमें सफर करने वाला अधिकांश वर्ग गरीब मजदूर, छोटे फुटकर व्यापारी और छात्र हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिक मंचों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटनाक्रम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने रेल मंडल प्रबंधक (DRM) से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव समय का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि आम जनता की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ न हो।







































































