कोयला गैसीकरण तकनीक को नई रफ्तार: सीएमपीडीआई और सीएसआईआर-सिम्फर के बीच एमओयू

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कोयला गैसीकरण तकनीक को नई रफ्तार: सीएमपीडीआई और सीएसआईआर-सिम्फर के बीच एमओयू

पांच साल का समझौता, परियोजनाओं के विकास से लेकर तकनीकी आकलन और बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन तक दोनों संस्थान करेंगे सहयोग

रांची। भारत में कोयला गैसीकरण तकनीकों को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं के विकास के लिए सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई), रांची और सीएसआईआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीएसआईआर-सिम्फर), धनबाद के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के विकास, तकनीकी अध्ययन और उनके क्रियान्वयन के लिए दोनों संस्थानों के बीच वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

एमओयू पर सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह तथा डीजीएमएस के महानिदेशक आर.टी. मंडेकर की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। सीएमपीडीआई की ओर से विभागाध्यक्ष, बिजनेस डेवलपमेंट विक्रांत गुप्ता और सीएसआईआर-सिम्फर के टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड इंटरनेशनल एसएंडटी अफेयर्स डिवीजन के प्रधान वैज्ञानिक-जी अमर नाथ ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर सीएमपीडीआई के महाप्रबंधक (क्लीन एनर्जी डिपार्टमेंट) बी.के. पांडे, क्षेत्रीय संस्थान-2 धनबाद के क्षेत्रीय निदेशक घनश्याम एस. गहलोत तथा सीएसआईआर-सिम्फर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा भी उपस्थित रहे।

सरफेस कोल गैसीकरण परियोजनाओं पर विशेष जोर

समझौते का प्रमुख उद्देश्य कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के विकास और उनके क्रियान्वयन में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत विशेष रूप से सरफेस कोल गैसीकरण परियोजनाओं के लिए प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट और विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने में सहयोग किया जाएगा।

इस पहल के माध्यम से संभावित परियोजनाओं की तकनीकी व्यवहार्यता, आर्थिक संभावनाओं तथा परियोजना के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा। इससे कोयला गैसीकरण क्षेत्र में परियोजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सीएसआईआर-सिम्फर बनेगा नॉलेज पार्टनर

एमओयू के तहत सीएसआईआर-सिम्फर को प्रोसेस इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए नॉलेज पार्टनर की भूमिका दी गई है। संस्थान द्वारा फीडस्टॉक के आकलन, उपयुक्त गैसीफायर के चयन, प्रोसेस डेवलपमेंट, टेक्नो-इकोनॉमिक एनालिसिस तथा पायलट स्तर पर तकनीकी उपलब्धियों के मूल्यांकन में सहयोग किया जाएगा।

वहीं सीएमपीडीआई प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एवं इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर के रूप में कार्य करेगा। इसकी जिम्मेदारी परियोजना की योजना तैयार करने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने और कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में काम करने की होगी।

तकनीक के व्यावसायीकरण पर भी रहेगा फोकस

समझौते के तहत केवल तकनीकी विकास ही नहीं, बल्कि परियोजनाओं के व्यावसायिक पहलुओं पर भी काम किया जाएगा। इसमें इंजीनियरिंग एवं डिजाइन से जुड़े तकनीकी इनपुट, टेक्नो-इकोनॉमिक मूल्यांकन, परियोजना स्थल एवं आधारभूत संरचना का आकलन, पर्यावरणीय और नियामकीय मूल्यांकन शामिल हैं।

इसके अलावा विकसित तकनीक के व्यावसायीकरण तथा संभावित तकनीकी एवं औद्योगिक साझेदारों की पहचान पर भी दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे प्रयोगशाला एवं पायलट स्तर पर विकसित तकनीकों को व्यावहारिक परियोजनाओं तक पहुंचाने का मार्ग तैयार हो सकता है।

पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगा समझौता

सीएमपीडीआई और सीएसआईआर-सिम्फर के बीच हुआ यह एमओयू पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगा। दोनों संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव को एक साझा मंच पर लाकर भारत में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के विकास के लिए एक सुव्यवस्थित सहयोगात्मक ढांचा तैयार करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीकी विकास, परियोजना योजना, आर्थिक एवं पर्यावरणीय आकलन और व्यावसायिक क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ने वाला यह सहयोग देश में गैसीकरण आधारित परियोजनाओं के लिए तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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