अमरकंटक में गूंज रही भक्ति की स्वर लहरियां , नानी बाई रो मायरो कथा में सराबोर हो रहे श्रद्धालु

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अमरकंटक में गूंज रही भक्ति की स्वर लहरियां , नानी बाई रो मायरो कथा में सराबोर हो रहे श्रद्धालु

शांति कुटी आश्रम में संगीतमय कथा का शुभारंभ,मां नर्मदा उद्गम कुंड तक निकली कलश शोभायात्रा

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम/स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक जो प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल है । अमरकंटक में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला के अंतर्गत शांति कुटी आश्रम में दो दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा एवं श्रीराम नाम संकीर्तन का शुभारंभ शनिवार 19 सितंबर 26 को श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में कथा के शुभारंभ अवसर पर कलश शोभायात्रा निकाली गई जो मां नर्मदा उद्गम मंदिर पहुंच पूजा अर्चन के साथ भजन-कीर्तन , संकीर्तन और भक्तिमय जयकारों से नर्मदा उद्गम स्थल परिसर , शांति कुटी आश्रम सहित नगर का वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया ।
वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर में श्री बलराम सत्संग मंडल द्वारा प्रत्येक रविवार को नियमित सुंदरकांड पाठ के माध्यम से रामभक्ति एवं सत्संग की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है ।

शांति कुटी आश्रम से मां नर्मदा उद्गम स्थल तक निकली कलश शोभायात्रा

शांति कुटी आश्रम में नानी बाई रो मायरो कथा के शुभारंभ अवसर पर शनिवार को महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं की सहभागिता में कलश शोभायात्रा निकाली गई । राजस्थान के पारंपरिक परिधानों में सजे श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए । बैंड एवं डीजे पर गूंजते भक्ति गीतों और जयकारों के बीच शोभायात्रा शांति कुटी आश्रम से प्रारंभ होकर मां नर्मदा उद्गम मंदिर , कुंड पहुंची ।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते और नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे । नर्मदा उद्गम कुंड एवं मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश एवं पुराण का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया । इसके पश्चात श्रद्धालु नर्मदा मंदिर से वापस पुनः शांति कुटी आश्रम पहुंचे जहां विशाल सभागार में कलश स्थापना की गई । आचार्य एवं पुरोहितों द्वारा पुराण पूजन , आरती एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए ।

डॉ. पं. नरेंद्र पाण्डेय के मुखारविंद से हो रहा कथा का रसपान

शांति कुटी आश्रम में दो दिवसीय आयोजित नानी बाई रो मायरो कथा का वाचन भागवत शास्त्रज्ञ एवं धर्मप्रचारक डॉ. पं. नरेंद्र पाण्डेय द्वारा किया जा रहा है । शनिवार 19 सितंबर को कथा के दो सत्र निर्धारित किए गए हैं। प्रथम सत्र प्रातः 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा द्वितीय सत्र शाम 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक आयोजित किये गए है ।

नानी बाई रो मायरो की कथा भक्त नरसी मेहता की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति , अटूट विश्वास और समर्पण से जुड़ी है । मान्यता एवं लोकपरंपरा में प्रचलित इस भक्तिप्रधान प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने भक्त की लाज रखने और भक्त के विश्वास की रक्षा करने का भाव प्रमुखता से अभिव्यक्त होता है । कथा के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति , प्रेम , श्रद्धा और ईश्वरीय कृपा के प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं ।

यह धार्मिक आयोजन शांति कुटी आश्रम के परम संरक्षक महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज एवं महंत सोमेश्वर गिरी महाराज के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है ।

रविवार को राम नाम संकीर्तन , मायरे की विशेष प्रस्तुति

दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के दूसरे दिन रविवार 20 सितंबर को प्रातः 9 बजे से 11 बजे तक श्रीराम नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा । इसके पश्चात दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक नानी बाई रो मायरो कथा के अंतर्गत मायरे की विशेष प्रस्तुति होगी ।
संगीतमय कथा , भजन एवं संकीर्तन के इन आयोजनों में श्रद्धालु भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की भक्ति में सहभागी बनेंगे । आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है

जयपुर में प्रत्येक रविवार नियमित सुंदरकांड पाठ
, राजस्थान की राजधानी जयपुर के गणेश नगर आगरा रोड स्थित श्री बलराम सत्संग मंडल द्वारा प्रत्येक रविवार को नियमित सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है। प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक होने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालु सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ कर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं।
यह आयोजन श्री श्री 1008 श्री रामावतार स्वामी श्री बलराम जी महाराज के संरक्षण एवं सान्निध्य में संपन्न होता है । सत्संग मंडल की ओर से श्रद्धालुओं से परिवार सहित सुंदरकांड पाठ एवं धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित होकर प्रभु भक्ति का लाभ लेने की अपील की गई है ।

कथा , संकीर्तन और सत्संग से प्रवाहित हो रही भक्ति की धारा

अमरकंटक के शांति कुटी आश्रम में नानी बाई रो मायरो कथा एवं श्रीराम नाम संकीर्तन और जयपुर में नियमित सुंदरकांड पाठ के आयोजन श्रद्धा , भक्ति एवं सत्संग की परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं । इन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन , भजन-कीर्तन और प्रभु स्मरण से जुड़ने का अवसर मिल रहा है । भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत ये आयोजन श्रद्धालुओं के मन में आस्था , समर्पण और भक्ति भाव को सुदृढ़ कर रहे हैं

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