स्वामित्व रजिस्ट्री में पटवारियों को ‘निष्पादक’ बनाने पर सरकार-पटवारी संघ आमने-सामने
अनूपपुर। भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक में संघ ने दो टूक कहा—कानूनी पात्रता स्पष्ट किए बिना नहीं करेंगे निष्पादन; कैडर रिव्यू की मांग पूरी होने पर सहयोगी की भूमिका निभाने का प्रस्ताव
मध्यप्रदेश में ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्री दस्तावेज का निष्पादक बनाए जाने को लेकर चल रहा विवाद अब शासन स्तर की बातचीत तक पहुंच गया है। इसी सिलसिले में 19 सितंबर 2026 को भोपाल में आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यप्रदेश पटवारी संघ सहित प्रदेश के अन्य पटवारी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।
उक्त जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि बैठक से पहले आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन कार्यालय की ओर से पत्र जारी कर स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के संबंध में पटवारी संघ द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में उठाई गई विधिक, प्रक्रियात्मक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के निराकरण के लिए चर्चा हेतु प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।
‘निष्पादक’ की भूमिका पर पटवारियों की साफ आपत्ति
बैठक में पटवारी संगठनों ने एकमत होकर कहा कि उनका विरोध स्वामित्व योजना अथवा ग्रामीणों को मिलने वाले स्वामित्व अधिकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि पटवारी को व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री दस्तावेज का ‘निष्पादक’ बनाए जाने को लेकर है।
संघ पदाधिकारियों का कहना रहा कि पटवारी संवर्ग को इस प्रकार के दस्तावेज का कानूनी निष्पादन करने की पात्रता और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हैं। ऐसे में भविष्य में स्वामित्व, कब्जे, वारिस, सीमांकन, चतुस्सीमा अथवा अभिलेख संबंधी विवाद सामने आने पर व्यक्तिगत रूप से पटवारी की जवाबदेही तय होने की आशंका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पटवारी संगठन पहले भी इसी मुद्दे को लेकर शासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं।
पटवारी संगठनों ने यह भी सवाल उठाया कि ड्रोन सर्वे, आबादी रिकॉर्ड, नक्शे, प्लॉट की सीमा अथवा हितग्राही की पहचान में भविष्य में कोई त्रुटि सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर निर्धारित होगी। यही वजह है कि संघ स्पष्ट कानूनी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहा है।
कैडर रिव्यू की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठी
बैठक में पटवारियों ने अपने कैडर एवं वेतनमान रिव्यू की लंबित मांग को भी प्रमुखता से रखा। संघ की ओर से कहा गया कि यदि शासन पटवारी संवर्ग की कैडर रिव्यू संबंधी मांग का अविलंब निराकरण करता है और स्वामित्व योजना में पटवारी की भूमिका को निष्पादक के बजाय सहयोगी के रूप में स्पष्ट करता है, तो पटवारी इस पूरी प्रक्रिया में अन्य संबंधित विभागों के साथ सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
अर्थात संघ ने योजना के क्रियान्वयन में सहयोग से इनकार नहीं किया है, लेकिन पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही डालने वाली निष्पादक की भूमिका स्वीकार करने पर आपत्ति कायम रखी है।
मंडला और रायसेन के मामलों पर भी जताया विरोध
बैठक के दौरान मंडला और रायसेन जिलों में पटवारियों के साथ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे दबावपूर्ण व्यवहार का मुद्दा भी उठाया गया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मैदानी स्तर पर पटवारियों पर लगातार अतिरिक्त कार्यों और विभिन्न योजनाओं का दबाव बनाया जा रहा है। यदि अधिकारियों द्वारा इसी प्रकार का कथित दबाव और कार्रवाई जारी रही तो प्रदेश का पटवारी संवर्ग आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।
स्वामित्व योजना को लेकर प्रदेश के कई जिलों में पहले ही पटवारियों ने विरोध दर्ज कराया है और कुछ स्थानों पर कार्य से विरत रहने की चेतावनी भी दी गई है।
अब शासन के निर्णय पर टिकी नजर
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रदेश में शुरू हो चुकी है और सरकार का लक्ष्य बड़ी संख्या में ग्रामीण संपत्तियों का पंजीयन कराना है। इसी प्रक्रिया में पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाए जाने की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया है।
अब भोपाल में हुई इस बैठक के बाद पटवारी संगठनों की नजर शासन के अगले कदम पर है। संघ का रुख स्पष्ट है कि स्वामित्व योजना के कार्य में सहयोग किया जा सकता है, लेकिन पटवारियों को व्यक्तिगत कानूनी जोखिम वाली ‘निष्पादक’ की भूमिका स्वीकार नहीं है। साथ ही कैडर रिव्यू तथा मैदानी अधिकारियों के कथित दबाव से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग भी संघ ने शासन के समक्ष रख दी है।


































































