मां नर्मदा तट पर श्रद्धा और सौहार्द के साथ हुआ कजलियों का विसर्जन

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मां नर्मदा तट पर श्रद्धा और सौहार्द के साथ हुआ कजलियों का विसर्जन

भेंट-मिलन की परंपरा निभाकर श्रद्धालुओं ने मांगी सुख-समृद्धि की कामना

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा के अवसर पर शनिवार को कजलियों का पारंपरिक एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन किया गया । मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धालुओं ने कजलियों का पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-शांति , समृद्धि , आरोग्य एवं मंगलमय जीवन की कामना की ।

कजलियों के पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला । घरों में बोई गई कजलियों का विधिवत पूजन कर उन्हें कोटि तीर्थ घाट , रामघाट , पुष्कर बांध घाट , बांधा घाट एवं अरंडी संगम घाट सहित विभिन्न पवित्र स्थलों पर श्रद्धापूर्वक विसर्जित किया गया । श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा एवं आराध्य देवी-देवताओं से परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की ।

कजलियों के साथ भेंट-मिलन की परंपरा निभाई गई ।

इस अवसर पर महिलाओं एवं पुरुषों ने एक-दूसरे के कान और सिर पर कजलियां रखकर शुभकामनाएं दीं तथा सुख , समृद्धि और खुशहाली की कामना की । यह परंपरा सामाजिक सौहार्द , प्रेम और आत्मीयता का प्रतीक बनी रही ।
कजलियों का पर्व भारतीय लोकजीवन में हरियाली , उर्वरता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है । अंकुरित होकर हरी-भरी हुई कजलियां जीवन की निरंतरता और समृद्धि का संदेश देती हैं ।
मां नर्मदा के उद्गम क्षेत्र अमरकंटक में यह परंपरा विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है ।
दिनभर श्रद्धालुओं द्वारा पूजन , भेंट-मिलन और विसर्जन का क्रम चलता रहा । मां नर्मदा तट पर लोक परंपरा और अध्यात्म का सुंदर संगम देखने को मिला ।

कजलियों के इस पर्व ने एक बार फिर सामाजिक समरसता , पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का संदेश दिया ।

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