अमरकंटक में श्रावण की वर्षा, प्रकृति का सौंदर्य और जनजीवन की चुनौतियां
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / आस्था की नगरी अमरकंटक इन दिनों श्रावण मास की निरंतर वर्षा से पूरी तरह सराबोर है । श्रावण मास प्रारंभ होते ही जहां एक ओर शिवभक्तों , कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है , वहीं दूसरी ओर कई दिनों से रुक-रुक कर तथा कभी मूसलाधार हो रही बारिश ने स्थानीय लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है । धूप न निकलने , कपड़े न सूखने , आवागमन में कठिनाइयों और दैनिक कार्यों में बाधा के कारण निवासी अब लगातार हो रही वर्षा से कुछ हद तक परेशान नजर आने लगे हैं । जिन घरों , गौशालाओं में पशुपालन हो रहा वहां भी कठिनाइयां आ रहीं ।
श्रावण मास में अमरकंटक की धार्मिक गतिविधियां अपने चरम पर रहती हैं । नर्मदा उद्गम मंदिर , विभिन्न शिवालयों और धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है । विशेष रूप से सावन के सोमवार को शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है । बच्चे , युवा , महिलाएं और बुजुर्ग सभी भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन दिखाई देते हैं ।
अमरकंटक में कांवड़ियों का तांता लगातार लगा हुआ है और दूर-दूर से श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं ।
हालांकि अमरकंटक में प्रतिवर्ष अच्छी वर्षा होती है , लेकिन इस वर्ष सावन लगने से पूर्व से ही बादलों ने अपना डेरा जमा लिया था । पूरे श्रावण मास में लगातार हो रही बारिश ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों की परीक्षा ली है । अन्य कई स्थानों पर जलभराव जैसी स्थितियां बनीं , जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ और लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा ।
वहीं दूसरी ओर वर्षा ने अमरकंटक की प्राकृतिक छटा को भी अभूतपूर्व रूप से निखार दिया है । यहां के डेम , तालाब और जलाशय लबालब भर चुके हैं । पहाड़ों से उतरते झरने , कल-कल बहती जलधाराएं और हरियाली से आच्छादित वन क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं । कई बार बादल इतनी निचली सतह तक उतर आते हैं कि दूर तक का दृश्य ओझल हो जाता है और पूरा क्षेत्र किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत होने लगता है । वाहनों की गति भी धीमी हो जाती है ।
यही कारण है कि बारिश से होने वाली परेशानियों के बावजूद अमरकंटक आने वाले पर्यटक , श्रद्धालु और प्रकृति प्रेमी यहां के मनोहारी दृश्यों का भरपूर आनंद ले रहे हैं । मां नर्मदा की पावन जन्मस्थली के चारों ओर फैली हरियाली , पर्वतों के बीच बहता निर्मल जल और बादलों की अद्भुत छटा लोगों को प्रकृति के और करीब ले जाकर एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान कर रही है ।
महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज (शांति कुटी आश्रम) ने बताया कि अत्यधिक दिनों तक लगातार वर्षा होने से स्थानीय निवासियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । श्रद्धालु और पर्यटक भी पर्याप्त भ्रमण नहीं कर पाते तथा वस्त्र आदि सुखाने में कठिनाई होती है ।
वहीं सांसद प्रतिनिधि प्रकाश द्विवेदी (विक्की) ने कहा कि अमरकंटक में वर्षा के बावजूद बाढ़ का कोई खतरा नहीं रहता । बादलों का धरातल तक उतर आना और उनकी मनमोहक छटा पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है , जिसका लोग भरपूर आनंद उठा रहे हैं । इस ओर नगर पालिका प्रशासन की पूरी नजर है ।
श्रावण की यह वर्षा जहां एक ओर जनजीवन के लिए चुनौतियां लेकर आई है , वहीं दूसरी ओर अमरकंटक की प्राकृतिक और आध्यात्मिक सुंदरता को भी नए आयाम प्रदान किए हैं । यही कारण है कि कठिनाइयों के बीच भी अमरकंटक की वादियां इन दिनों श्रद्धा , भक्ति और प्रकृति के अद्भुत संगम का अनुपम दृश्य प्रस्तुत कर रही हैं ।












































